केले के पत्तों की बढ़ती कीमतें: गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार में उछाल

केले के पत्तों की मांग में अचानक बढ़ोतरी

गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर दक्षिण भारत में इसका खास महत्व है। हर साल जब गणेश चतुर्थी आती है, तो बाजार में खास तरह की सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इस साल भी कुछ अलग नहीं हुआ। थूथुकुडी जिले में केले के पत्तों की मांग अचानक से बढ़ गई है। इस क्षेत्र में केले की खेती प्रमुख है, और यहां के किसान गणेश चतुर्थी के दौरान केले और इसके पत्तों को बड़ी मात्रा में तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में बिक्री के लिए ले जाते हैं।

शुभ मुहूर्त और त्योहार के चलते बढ़े दाम

इस बार विशेष बात यह रही कि न सिर्फ गणेश चतुर्थी बल्कि शुभ मुहूर्त के चलते भी केले के पत्तों की मांग में बड़ा उछाल देखा गया। शुभ मुहूर्त यानी वह समय जब लोग शादियां और अन्य शुभ कार्य करते हैं, इस वजह से पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में केले के पत्तों की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। पूजा-पाठ, हवन और शुभ कार्यों में केले के पत्तों का इस्तेमाल शुभ माना जाता है।

शनिवार को गणेश चतुर्थी के साथ ही शुभ मुहूर्त भी था, जिस कारण केले के पत्तों की बड़ी मात्रा में नीलामी की गई। थूथुकुडी और आसपास के क्षेत्रों में केले के पत्तों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

नीलामी और बढ़ी हुई कीमतें

शनिवार को थूथुकुडी जिले के कुरुमपुर, एरल, सैरपुरम, कोरामपल्लम और वझावल्लन क्षेत्रों के केले किसानों ने बड़े पैमाने पर केले के पत्तों की कटाई की और उन्हें स्थानीय सब्जी मंडियों में बिक्री के लिए लाए। गणेश चतुर्थी और शुभ मुहूर्त के मौके पर केले के पत्तों की बड़ी मात्रा में नीलामी हुई।

पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले केले की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस बार केले का एक गुच्छा 600 रुपये तक बिक रहा है, जबकि कुछ विशेष किस्म के केले जैसे मार्स किस्म का दाम 800 रुपये तक जा पहुंचा है। केले की कीमतों में यह उछाल गणेश चतुर्थी और शुभ मुहूर्त की मांग के कारण हुआ है।

गणेश चतुर्थी और केले का महत्व

गणेश चतुर्थी का त्योहार हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उत्सव भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और दस दिनों तक चलता है। इस साल यह त्यौहार 7 सितंबर से शुरू हुआ। भगवान गणेश को नई शुरुआत का देवता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है, इसलिए इस दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।

गणेश जी की पूजा में केले का विशेष स्थान है। न सिर्फ पूजा में बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों और प्रसाद बनाने में भी केले का उपयोग होता है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दौरान केले और इसके पत्तों की मांग बहुत ज्यादा होती है। दक्षिण भारत में खासतौर पर केले के पत्तों का उपयोग धार्मिक कार्यों, प्रसाद और भोजन के लिए किया जाता है। केले के पत्ते पर भोजन करना शुभ माना जाता है और इसी कारण इस पवित्र अवसर पर इनकी मांग तेजी से बढ़ती है।

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केले की खेती का महत्त्व

थूथुकुडी में केले की खेती बहुतायत से होती है और यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति केले की फसल से ही जुड़ी होती है। इस बार गणेश चतुर्थी के साथ शुभ मुहूर्त के कारण किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। केले के पत्तों की मांग से किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है, जो उनके लिए वरदान साबित हो रही है। बाजार में केले के पत्तों की कीमतें बढ़ने से किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।

पूजा सामग्री के बढ़ते दाम

केले के पत्तों के साथ-साथ गणेश चतुर्थी के मौके पर पूजा सामग्री के अन्य सामानों की कीमतें भी बढ़ी हैं। फूल, धूप, नारियल और मिठाई जैसे सामग्री की मांग में भी इस अवसर पर बड़ा इजाफा हुआ है। पूजा सामग्री के व्यापारी भी इस समय लाभ कमा रहे हैं क्योंकि मांग अधिक है और आपूर्ति सीमित। गणेश चतुर्थी के साथ शुभ मुहूर्त का संयोग होने के कारण इस बार बाजार में रौनक और भी ज्यादा है।

मुंबई का लालबागचा राजा और गणेशोत्सव

मुंबई का लालबागचा राजा गणेश चतुर्थी के उत्सव का एक मुख्य आकर्षण है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए लालबागचा राजा के पंडाल में पहुंचते हैं। इस साल भी गणेश चतुर्थी के पहले ही दिन लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार को लालबागचा राजा का पहला दर्शन हुआ, जिससे पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम मच गई।

लालबागचा राजा के दर्शन करना हर श्रद्धालु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यही वजह है कि मुंबई में गणेश चतुर्थी के दौरान पूजा सामग्री की मांग अन्य जगहों से भी ज्यादा होती है। इस बार गणेश उत्सव के साथ शुभ मुहूर्त होने के कारण मुंबई और अन्य जगहों पर भी पूजा सामग्री के दामों में भारी उछाल देखा गया है।

केले के पत्तों की मांग और भविष्य

गणेश चतुर्थी के साथ ही शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है और केले के पत्तों की भी। यह देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में क्या यह मांग बनी रहती है या फिर कीमतें स्थिर हो जाती हैं। किसानों के लिए यह एक अच्छा अवसर है कि वे अपनी उपज से अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकें। बाजार में केले के पत्तों की मांग से किसानों को फायदा हो रहा है और यह उनके लिए एक अच्छा समय है।

अगर इस साल की गणेश चतुर्थी की बात की जाए तो केले के पत्तों की कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार में एक खास बदलाव ला दिया है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से व्यापारियों और किसानों दोनों को लाभ हो रहा है। आने वाले वर्षों में भी इसी तरह की मांग देखी जा सकती है, खासकर तब जब शुभ मुहूर्त और गणेश चतुर्थी का संयोग हो।

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