बलिया। 15 महीने के अपने शिशु को पाने के लिए Child Welfare Committee (सीडब्ल्यूसी) कार्यालय पहुंची एक महिला की उसके पति और देवरों द्वारा पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता रिंकू ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2023 में हल्दी थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर निवासी कांस्टेबल धर्मेंद्र राम के साथ हुई थी। शादी के बाद उन्हें एक पुत्र हुआ, जिसकी उम्र लगभग 15 माह है। रिंकू के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद पारिवारिक विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद उसका पति उसे जौनपुर ले गया। वहां भी विवाद समाप्त नहीं हुआ।
रिंकू का आरोप है कि 19 अगस्त 2025 को उसका पति उसे घर वापस लाया और 15 माह के बेटे विश्वजीत को उससे छीनकर अपने साथ ले गया तथा उसे मायके भेज दिया। इसके बाद अपने बच्चे को वापस पाने के लिए वह सीडब्ल्यूसी की शरण में पहुंची।
पीड़िता के अनुसार, सीडब्ल्यूसी के आदेश के क्रम में उसने Uttar Pradesh Police के माध्यम से बलिया पुलिस अधीक्षक से जौनपुर जाने की अनुमति प्राप्त की। 6 मार्च 2026 को वह अपने परिजनों के साथ जौनपुर पुलिस लाइन पहुंची, जहां धर्मेंद्र मौजूद मिला। रिंकू ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार बच्चे को मां को सौंपने की बात कही गई, लेकिन उसके पति ने बच्चे को देने से इनकार कर दिया और उसे वहां से भगा दिया।
इसके बाद 9 मार्च को पीड़िता फिर से सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंची। इस दौरान हल्दी थाना प्रभारी पीड़िता और उसके परिजनों के साथ कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि उसी समय जौनपुर से आए दरोगा के साथ उसके पति और देवर भी वहां पहुंच गए और उन्होंने रिंकू के साथ मारपीट शुरू कर दी।
सूचना मिलने पर शहर कोतवाल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेने के बाद पीड़िता से तहरीर लेकर चले गए। मामले में अब तक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उसे अपने बच्चे से मिलने का अधिकार नहीं मिल पाया है।
संजय सिंह रिपोर्टर बलिया








