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बिहार में शहरी कृषि भूमि पर घर बनाना होगा महंगा: नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

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हमारे बिहार में सारे क्षेत्र में कृषि भूमि पर घर बनाना या फिर गलत तरीके से कृषि काम के लिए अब अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा आपको नीतीश सरकार ने इस दिशा में बहुत बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत सरकारी क्षेत्र में जितने भी कृषि भूमि है उसका इस्तेमाल बदलने पर शुल्क वसूला जाएगा आपसे इसका मकसद यही है कि सारे कलर को नियंत्रित करना है और कृषि भूमि का सही तरीका से इस्तेमाल हो सके या सुनिश्चित करना है।

इस फैसले के तहत सारे क्षेत्र की कृषि भूमि और गैर तरीके से कृषि कामों के लिए इस्तेमाल करने से पहले सरकार से अनुमति लेना पड़ेगा। इससे जुड़े व्यक्ति को रास्ता और भूमि के सुधार विभाग से परमिशन लेना पड़ेगा और तय किए हुए शुल्क का भी भुगतान करना पड़ेगा आपको या कम सारी विकास की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और कृषि भूमि के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाए जा रहा है।

शहरी क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि इस्तेमाल

बिहार में लगातार शहरीकरण के चलते किसान भूमि पर घर और अन्य निर्माण कामों की मांग तेजी से बढ़ते जा रही है इस मांग को देखते हुए बिहार के सरकार ने सारी क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि के इस्तेमाल को बदलने पर खास ध्यान दिया है इसके तहत आप अगर कोई भी व्यक्ति कृषि भूमि को अवश्य व्यावसायिक इस्तेमाल में लाना चाहेगी तो उसे सरकार से पहले अनुमति लेना पड़ेगा इसके साथ ही निर्धारित शुल्क काव्य भुगतान करना पड़ेगा।

कृषि भूमि को अधिनियम के दायरे में लाना

इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए हमारे बिहार सरकार ने बिहार कृषि भूमि गैर कृषि प्रयोजनों संपन्न संपरिवर्तन अधिनियम 2010 के तहत सरकारी क्षेत्र की कृषि भूमि को भी शामिल करने के लिए योजना बनाया जा रहा है इस अधिनियम के तहत आप कृषि भूमि को गैर कृषि इस्तेमाल मिलने के लिए सरकारी अधिकारियों मंजूरी लेना पड़ेगा जिस की भूमि इस्तेमाल में खुलापन सुनिश्चित हो सकेगा आने वाले समय में या अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा लेकिन सारी क्षेत्र में भी इसके विस्तार रूप से योजना को बनाया जा रहा है।

नियम का उद्देश्य और मंशा

राजा और भूमि के सुधार विभाग के जरिए से यह फैसला किया गया है और इसका उद्देश्य है सारी कृषि भूमि के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने का शहरीकरण के साथ बढ़ते अनियंत्रित निर्माण कामों के लिए कई बार किसी भूमि का ज्ञान जिम्मेदाराना ढंग से इस्तेमाल किया है जिससे न केवल पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुआ है बल्कि भूमि से जुड़े का सुनिधि बढ़ाते आ रहे हैं सरकार का यह कदम इस दिशा में अनुशासन और न्याय संगत को लाने की दिशा में बहुत जरूरी साबित होगा।

शुल्क और अनुमति की प्रक्रिया

हमारे बिहार के सरकार में एक नए नियम के तहत सरकारी क्षेत्र के कृषि भूमि को गलत तरीके से कामों में इस्तेमाल करने के लिए जुड़े भूमि मालिक को राजस्व और भूमि सुधार विभाग से अनुमति लेना पड़ेगा इसके अलावा भूमि के इस्तेमाल में परिवर्तन के लिए आपको एक निर्धारित शुल्क का भी भुगतान करना है या शुक्ल भूमि के जाकर क्षेत्र और उसके भविष्य के इस्तेमाल पर आधारित है उदाहरण के तौर पर अगर किसी भी भूमि को आवासीय कॉलोनी या फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में इस्तेमाल करना है तो इसके लिए ज्यादा शुल्क वसूल करना पड़ेगा।

नगर विकास विभाग से मंतव्य की मांग

कुछ समय पहले इस विषय पर समीक्षा में बैठक हुआ था रास्ता और भूमि के सुधार विभाग ने नगर विकास विभाग से मांग की है कि अगर नगर विकास विभाग इस प्रस्ताव पर सहमति देती है तो यह नियम जल्दी से जल्दी लागू किया जाए यह फैसला हमारे बिहार के नगर निकायों में विकास और शहरीकरण की प्रक्रिया को एक नया रूप देने का फैसला लिया गया है नगर विकास भूमि से मंत्र मिलने के बाद जिस नियम को पूरे रूप से लागू करने के लिए प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।

शहरीकरण और भूमि का महत्व

बिहार जैसे राज्य में जहां पर अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं मतलब रहते हैं कार्यक्रम की प्रक्रिया धीरे-धीरे बढ़ रही है शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि का महत्व बहुत ज्यादा इसलिए है क्योंकि यह भूमि भविष्य में सहरी जरूरत पूरा करने के इस्तेमाल में आएगा बिहार सरकार का या कम शहरीकरण की मांग को ध्यान में रखते हुए कृषि भूमि का संरक्षण का न्याय संगत इस्तेमाल को सुनिश्चित किया जाएगा।

भविष्य की चुनौतियाँ

कालक्रिया फैसला हमारे बिहार के शहरीकरण की दिशा में एक बहुत जरूरी कदम है लेकिन इसके साथ कई सारी चुनौतियां भी जुड़ गई है पहले या की सरकारी क्षेत्र में भूमि की कीमतें पहले से बहुत ज्यादा हो गई है और अतिरिक्त शुल्क के लागू होने से या कीमत और भी ज्यादा बढ़ गया है इससे आम जनता जो है उनके लिए घर बनाने की प्रक्रिया और भी ज्यादा मुश्किल हो रही है दूसरा या के जमीन के इस्तेमाल के लिए अनुमति प्राप्त भीम बहुत

ज्यादा बढ़ गया है और कठिन हो गया है तो इससे भ्रष्टाचार का संभावना भी बढ़ रहा है।

अधिनियम 2010 की विशेषताएँ

बिहार कृषि भूमि गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम 2010 का प्रथम उद्देश्य क्या है की भूमि के इस्तेमाल में खुलापन लाना है और गैस और इसके से कृषि कामों के लिए कृषि भूमि के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकना है इस अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति बिना सरकारी अनुमति के कृषि भूमि का आवासीय व्यावसायिक या कोई भी गैर कृषि कामों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा इसके लिए जुड़े व्यक्ति को पहले एक आवेदन देना पड़ेगा जिससे कि बाद में भूमि सुधार विभाग उसे आवेदन की जांच करेंगे और यह तय करेंगे की भूमि का इस्तेमाल किस तरह से किया जा सकता है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर

यहां पर एक और ग्रामीण क्षेत्र में भूमि का इस्तेमाल कृषि कामों के लिए पहले रूप से किया जाएगा वहीं शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि का इस्तेमाल बदलकर आवासीय या व्यावसायिक निर्माण के लिए किया जाएगा यह आम बात हो गया है बिहार सरकार का या फैसला है कि साड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के इस्तेमाल के अंतर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की दिशा में एक कदम उठाया गया है यह बहुत जरूरी है इससे क्या है की सारी भूमि के गैर कृषि इस्तेमाल में अनुशासन आएगा और कृषि भूमि के अंधाधुंध इस्तेमाल पर भी रोक लगेगी।

समीक्षा और आगामी कदम

राजा और भूमि के सुधार विभाग ने इस नए नियम को लागू करने से पहले एक नए समीक्षा को किया है और अगर विकास विभाग के मंत्र में मिलने के बाद ही इसे कानूनी रूप से लागू करने के लिए प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा इसके लिए हमारे बिहार सरकार ने अलग-अलग विभागों और जुड़े अधिकारियों के साथ मिलकर के एक व्यापक योजना को भी तैयार किया जैसा कि हमारे भूमि इस्तेमाल में अनुशासन और खुलापन भी लाया जाएगा।

इस कदम से जनता पर प्रभाव

इस नए नियम के लागू होते ही बिहार के सरकार क्षेत्र में रह रहे लोगों का मानना है कि वहां घर बनाने को सोच रहे हैं लोग प्रभावित भी हो रहे हैं अधिक के लागू होने से भूमि की कीमत में इजाफा भी हो सकता है जिससे कि मकान बनाना और ज्यादा महंगा हो जाएगा साथ ही सरकार की अनुमति की जरूरत होने से भूमि से जुड़े पेपर सी कारवाही भी की बढ़ जाएगी जिससे की प्रक्रिया में समय लग सकता है अल्लाह के सरकार का लक्ष्य नेपाल का नियंत्रित करना बहुत जरूरी है और भूमि से जुड़े का सनी को भी काम करना है।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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