लैंड कनेक्शन आपको बता दे की आपके बिहार में भूमि सर्वे के समय ऐसे कई लोग होंगे जिनकी क्या खाता पर उल्लू की है जो कि पाकिस्तान चले गए थे 1968 के शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत इन सब संपत्तियो को सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है क्योंकि यह लोग पाकिस्तान में ही बस गए हैं और उनका कोई भी बारिश यहां भारत में नहीं है यह कानून भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद ही लागू हुआ है ताकि उन सब संपत्तियों को ठीक से संबंधित किया जा सके जो कि पाकिस्तानी नागरिकों का ही माना जाता है।
इस विषय पर बात करना इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां पर गलत तरीके से जमाबंदी और रजिस्ट्री की भी शिकायतें मिल रही है भोजपुरी और खगड़िया जैसे जिले में ऐसी संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और यह संभव है की भूमि सर्वे 2024 के समय और भी ऐसे मामले सामने आए इस लेख में हम शत्रु संपत्ति अधिनियम की खास विशेषताओं बिहार में इसके प्रभाव और संपत्ति सुरक्षा के उपाय पर भी ध्यान देंगे।
लैंड कनेक्शन से संबंधित कुछ मुख्य बिंदु
- बिहार भूमि के समय गलत तरीके से जमाबंदी के मामले आए सामने।
- शत्रु संपत्ति अधिनियम का परिचय।
- बिहार में शत्रु संपत्ति अधिनियम के मामले आए सामने।
- भविष्य के संभावित मामले आए सामने।
- भूमि सर्वे और अवैध जमाबंदी
बिहार में कुछ समय पहले ही भूमि सर्वे के समय ऐसे कई सारे मामले है जो की सरकारी जमीन की गलत तरीके से जमाबंदी के आरोप सामने आए हैं खास रूप से शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 का इस्तेमाल करते हुए उन संपत्तियों को सरकारी संपत्ति के नाम पर घोषणा कर दिया गया है जो कि पाकिस्तान चले गए हैं नागरिक भोजपुर और खगड़िया जैसे जिलों में ऐसी संपत्तियों की जमाबंदी को रद्द कर दिया गया है या स्थिति हमारे भूमि सर्वे 2024 के समय और ज्यादा कठिन हो सकता है।
शत्रु संपत्ति अधिनियम क्या है?
शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 हमारे भारत के संसद के जरिए पारित एक जरूरी अधिनियम है इसका प्रथम उद्देश्य दिया है कि पाकिस्तान के नागरिकों के जरिए भारत में जो छोड़ दिए गए थे संपत्ति उसका नियमन करना है अगर कोई व्यक्ति आजाद के समय या उसके बाद पाकिस्तान चला गया और उसके पास कोई भी वारिस नहीं है तो उसकी संपत्ति सरकार के जरिए सरकारी संपत्ति के नाम से घोषित कर दिया जाएगा।
अधिनियम की विशेषताएँ
- हमारे भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तैयार किया गया है।
- इसमें केवल भूमि नहीं है बल्कि मकान, सोना गहना और कंपनियों के शेयर्स भी शामिल होते हैं।
- मंत्रालय इस अधिनियम को लागू करते हैं जिसके तहत सरकार उन संपत्तियों को अपने काबू में कर लेते हैं।
बिहार में शत्रु संपत्ति अधिनियम का मामला
हमारे बिहार में इस अधिनियम का इस्तेमाल कुछ समय पहले कई सारे मामले किए गए हैं जो की भोजपुर जिले के बड़हरा ब्लॉक में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां की 68 डिसमिस जमीन की जमा बंदी चुके हैं जो कि नागरिक कथा और इसका कोई भी बारिश नहीं है इसके बावजूद भी इस जमीन कि हम आपको कर लिया गया है।
खगड़िया का मामला
खगड़िया में भी ऐसा संपत्ति है जो जिसका मामले सामने आया है भारत सरकार के गृह मंत्रालय के जरिए से एक पत्र के जरिए से खरीदने और बेचने पर रोक लगा दिया गया है उदाहरण के लिए है क्षेत्र हाजीपुर में 1 बीघे, 13 कट्ठे, 10 धूर भूमि खरीदना और बेचने पर रोक लगा दिया गया है। इस जमीन की जो कीमत है वह करोड़ों रुपए में है। और यह क्रिया शहर में स्थित है ऐसे कई सारे मामले हैं जो कि सामने आ सकते हैं जहां पाकिस्तान के नागरिकों की जमीन है उसको सरकारी संपत्ति के नाम पर घोषित कर दिया गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
हमारे बिहार में भूमि सर्वे 2024 के समय और भी ऐसे कई मामले हैं जिसका सामना किया जा सकता है सरकार की कार्यवाही के चलते संभावित है कि कई और प्लांट है जो कि पाकिस्तान चले गए हैं नागरिक जो कि वह मालिक थी उनकी स्थिति भी स्पष्ट रूप से होगी या केवल बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऐसी संपत्ति की खोज करने के लिए जरूरी दिखता है।
आपके प्लॉट की सुरक्षा
यह सुनिश्चित करना है कि आपकी संपत्ति पर कोई संकट ना आए।
- यह आप को करना है कि आपके पास सभी जरूरी पेपर रहे और वह सही तरीके से हो।
- अपनी संपत्ति की स्थिति को जांच करने के लिए क्या वह किसी कहानी में है या नहीं।
- अगर आपकी संपत्ति शत्रु संपत्ति अधिनियम के अंदर आती है तो उचित कानूनी सलाह ले सकते हैं।









