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बिहार में नई जमीन रजिस्ट्री के नियम: एक नई शुरुआत

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बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नए नियम आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं 24 सितंबर से जो लागू होने वाला है कि हमारे राज्य सरकार में भूमि पर कहासुनी है उसको कम करने के लिए और रजिस्ट्री प्रक्रिया को खुलापन बनाने के लक्ष्य से बनाया गया है जो कि राज्य के भूमि कहासूनी पर बहुत ज्यादा समय से एक बहुत बड़ी समस्या आई है जिससे कि निपटने के लिए सरकार ने या जरूरी कदम उठाया है एक नए नियम के तहत रजिस्ट्री के प्रक्रिया को डिजिटल और ज्यादा सुरक्षित बनाया जाएगा ताकि आप सबको आसानी से और बिना किसी भी झंझट के भूमि से जुड़े जितने भी फाइल है वह मिल सके।

इन सब बदलाव के आधार कार्ड से भूमि मालिक की जांच, इलेक्ट्रॉनिक स्टाफ पेपर का इस्तेमाल और ऑनलाइन रजिस्ट्री जैसे कदम शामिल है इससे क्या की रजिस्ट्री भीम और ज्यादा तेज आसान हो जाएगा जिससे की धोखाधड़ी की संभावना जो है वह काम हो जाएगी मुख्यमंत्री नीतीश सरकार ने के देखरेख में या कदम उठाया गया है जो कि राज्य सरकार में भूमि कहासुनी को नियंत्रित करने और विकास के कामों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए उम्मीद की जा रही है।

जमींन रजिस्ट्री से सम्बन्धित मुख्य बिंदु:

  •     अब आपके जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हो गई है। इससे आप लोगों को सरकारी ऑफिस में बार बार जाने की कोई जरूरत नहीं है और इससे आपका समय की बचत होती है।
  •   आपके जमीन की रजिस्ट्री के लिए जरूरी फाइल की सूची सरल और खुलापन दी गई है। अब नागरिकों को केवल आधार कार्ड, पैन कार्ड, और संपत्ति से जुड़े कुछ जरुरी फाइल होंगे।
  • रजिस्ट्री के लिए लगने वाले शुल्क में बदलाव किया गया है। यह शुल्क अब भूमि के आकार और क्षेत्र के अनुसार तय किया जाता है, जिससे छोटे भूमि मालिकों पर अतिरिक्त भार नहीं पड।
  • नए नियमों के तहत फर्जी फाइल के जरिए जमीन की रजिस्ट्री पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। इसके लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और डिजिटल सिग्नेचर की व्यवस्था लागू की गई है।
  • यदि किसी व्यक्ति को जमीन रजिस्ट्री के दौरान कोई समस्या आती है, तो उसके लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने और समय पर समाधान पाने की सुविधा उपलब्ध है।

 भूमि कहासुनी की समस्या

हमारे बिहार में भूमि कहासुनी एक सामान्य समस्या है यहां पर भूमि से जुड़े जितने भी खास दुनिया उनकी संख्या बहुत ज्यादा है जिससे कि न केवल आप लोग परेशान होते हैं बल्कि विकास के कामों में भी बढ़ाया जाता है इस समस्या को ध्यान में रखते हुए हमारे बिहार के सरकार ने एक नए नियम का प्रस्ताव दिया है सरकार का यह मानना है कि खुलापन रजिस्ट्री प्रक्रिया में भूमि की कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा और कहासुनी भी काम हो जाएगा।

 नए नियमों की मुख्य बातें

इस नए नियम के तहत भूमि के रजिस्ट्री प्रक्रिया में कई जरूरी बदलाव किए गए हैं।

 1. आधार कार्ड की जरुरत

भूमिका रजिस्ट्री करवाने के लिए अब आधार कार्ड को दिखाना जरूरी होता है इससे यह सुनिश्चित होता है कि जो भी व्यक्ति भूमिका रजिस्ट्रेशन कर रहा है वह वास्तव में उसे जमीन का मालिक है आधार कार्ड का इस्तेमाल धोखाधड़ी को रोकने में मदद करता है।

2. ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया

बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नए नियम के तहत भूमि के जो मालिक है उनके होने का सबूत ऑनलाइन जांच किया जाएगा इससे पहले की जो प्रक्रिया है उसमें कठिनाई और समय की बर्बादी कम होगी अब आपको पेपर इकट्ठा करने में और उन्हें सत्यापित करने के लिए ज्यादा समय तक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

3. इलेक्ट्रॉनिक स्टांप का इस्तेमाल

आप स्टांप पेपर की जगह पर इलेक्ट्रॉनिक स्टांप का इस्तेमाल किया जाएगा इससे क्या है की प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक होगा स्टांप पेपर के लिए लंबे-लंबे लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं है और आपके रजिस्ट्री का काम भी जल्दी हो जाएगा।

4. ऑनलाइन फाइल जमा करना

अब आपको जमीन का नक्शा और अन्य जरूरी पेपर ऑनलाइन ही जमा करना है या एक और कम है जो की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान और खुलापन बनाने के लिए उठाया गया है अब आपको लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होने की कोई जरूरत नहीं है बल्कि आपका ज्यादातर काम अब ऑनलाइन नहीं हो जाएगा।

बिहार में नई जमीन रजिस्ट्री के नियमों की यह पहल एक बहुत जरुरी कदम है जो न केवल आप लोगों को ज्यादा सुविधा प्रदान करेगी बल्कि खुलापन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रियाओं को भी बढ़ावा देगी। इस नई शुरुआत से राज्य के विकास में एक नई दिशा मिलेगी और नागरिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार के ये प्रयास आने वाले समय में जमीन से जुड़े मामलों को सरल और सुगम बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से बिहार के लोग अधिक जागरूक और सक्षम होंगे, और विकास की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाएंगे।

 नीतीश कुमार की पहल

आपके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि के कहां भूमि को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है कि इस कहानी के चलते राज्य के विकास के कामों में दिक्कत आ रही है नए नियम के साथ रजिस्ट्री के प्रक्रिया में खुलापन और आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे कि कहां सुन की भी संभावना कम हो जाती है।

 नीतीश कुमार का दृष्टिकोण

आपके सर राज्य सरकार नीतीश कुमार ने या साफ-साफ कह दिया है कि उनका या फैसला हमारे बिहार के नागरिकों को ज्यादा समय तक के भूमि से जुड़े कहासुनी से राहत दिलाने का प्रयास है उनका उद्देश्य यह है कि आप लोग अपने भूमि से जुड़े जितने भी मामले हैं उसको आसानी से निपट सके और आपको किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

 भविष्य की योजनाएँ: ऑनलाइन भूमि रजिस्ट्री

बिहार के सरकार का यह योजना है कि भविष्य में अधिकांश भूमि की रजिस्ट्री भीम ऑनलाइन ही हो जाए इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगा बल्कि इसमें जो फर्जी कम होने की संभावना है वह बहुत कम हो जाएगी आधार कार्ड से ही भूमि के मालिक का सत्यापन प्रक्रिया पहले ही जरूरी किया जा चुका है जो की एक बहुत बड़ा कदम है इससे आपके भूमि मालिक के सही फाइल को ऑनलाइन सत्यापित करने का प्रक्रिया न केवल समय बचाएगा बल्कि या सुरक्षा के दृष्टि से भी जरूरी साबित होगा।

इलेक्ट्रॉनिक स्टांपिंग का लाभ

इलेक्ट्रॉनिक स्टापिंग के जरिए से स्टांप पेपर को जरूरी खत्म कर दिया गया है जो की रजिस्ट्री के प्रक्रिया को और भी ज्यादा सुरक्षित और खुलापन बनाएगी अब आप लोग बिना किसी भी चिंता के अपने भूमि के रजिस्ट्री को करवा सकते हैं।

24 सितंबर का इंतजार।

Red Heart

जैसे-जैसे 24 सितंबर पास आ रहा है वैसे वैसे बिहार के सभी लोग इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं की नई भूमि का रजिस्ट्री का नियम क्या होगा हालांकि अभी तक इस बारे में कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुआ है कि यह नियम उसे दिन लागू होगा भी या नहीं लेकिन यह संभावना है कि उसे दिन से यह बदला प्रभावित होगा अगर कोर्ट इस तारीख को आगे बढ़ता है तो यह जानकारी भी जल्दी-जल्दी सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

Red Heart

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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