Search
Close this search box.

पीएम स्वनिधि योजना: मेहनतकशों के लिए एक वरदान

पीएम स्वनिधि योजना

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए जो एक अनोखी पहल की है, वो है पीएम स्वनिधि योजना। ये कोई मुफ्त की सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि मेहनतकश लोगों के लिए एक सशक्त आर्थिक मदद है, जो उन्हें सूदखोरों से छुटकारा दिलाती है। इस योजना के तहत छोटे दुकानदार बिना किसी जमानत के बैंकों से लोन ले सकते हैं, और ब्याज दर भी बेहद कम होती है। यही वजह है कि यह योजना दिन-ब-दिन लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। आइए, जानते हैं कि पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसे कैसे पाया जा सकता है।

लॉकडाउन के दौरान एक नई उम्मीद

कोविड-19 महामारी के दौरान, जब देश में लॉकडाउन की वजह से छोटे दुकानदारों का काम ठप हो गया, तब सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। अधिकांश दुकानदारों की जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी और वे कठिन दौर से गुजर रहे थे। ऐसे में पीएम स्वनिधि योजना ने उन्हें एक नई उम्मीद दी। इस योजना के तहत सरकार ने छोटे व्यापारियों को 50,000 रुपये तक का लोन देने का प्रावधान रखा, ताकि वे अपने काम को दोबारा खड़ा कर सकें। खास बात ये है कि यह लोन तीन चरणों में दिया जाता है—पहले 10,000 रुपये, फिर 20,000 रुपये, और आख़िर में 50,000 रुपये, वो भी बिना किसी जमानत के।

मेहनत का फल, ब्याज की चिंता नहीं

अक्सर कहा जाता है, “अपना काम, अपना होता है”, चाहे वो छोटा हो या बड़ा। लेकिन किसी भी काम को शुरू करने के लिए सबसे पहले पूंजी की जरूरत होती है। आमतौर पर, लोग इस पूंजी को जुटाने के लिए सूदखोरों से उधार लेते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। इसी समस्या का समाधान है पीएम स्वनिधि योजना, जो कम ब्याज दर पर लोन देती है, ताकि लोगों को अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।

पीएम स्वनिधि योजना: क्या है और कैसे काम करती है?

वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की, जिसका मकसद छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, और छोटे कारोबारियों को बिना जमानत के लोन देना था। यह योजना उन लोगों के लिए वरदान साबित हुई, जिनका कोविड महामारी के दौरान व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस योजना के तहत एक साल के लिए अधिकतम 50,000 रुपये तक का लोन दिया जाता है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ वे सभी छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले ले सकते हैं, जो 24 मार्च 2020 से पहले अपना व्यवसाय कर रहे थे। इसके लिए उनके पास शहरी स्थानीय निकाय से वेंडिंग सर्टिफिकेट होना चाहिए। जिन वेंडर्स का सर्वे हुआ है लेकिन उनके पास सर्टिफिकेट नहीं है, वे प्रोविजनल सर्टिफिकेट से भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। स्थानीय पार्षद से भी इस बारे में मदद ली जा सकती है।

कितना लोन मिलता है?

इस योजना के तहत पहले चरण में 10,000 रुपये का लोन मिलता है, जिसे चुकाने के बाद 20,000 रुपये तक का लोन लिया जा सकता है। यदि इस राशि को समय पर चुका दिया जाता है, तो फिर तीसरे चरण में 50,000 रुपये तक का लोन मिलता है। बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां इस लोन पर आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार कम ब्याज दर लेती हैं, जो इसे और भी फायदेमंद बनाता है।

कैसे करें आवेदन?

पीएम स्वनिधि योजना के तहत लोन लेने के लिए सबसे पहले आपको अपने नजदीकी सरकारी बैंक में संपर्क करना होगा। बैंक से आपको एक फॉर्म मिलेगा, जिसे आपको अपने आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ जमा करना होगा। बैंक अधिकारी आपके फॉर्म और काम की जांच करेंगे और सब कुछ सही पाए जाने पर लोन अप्रूव कर दिया जाएगा। ध्यान रखें कि लोन की किस्तों का समय पर भुगतान करना जरूरी है, ताकि आप डिफॉल्टर की सूची में न आ जाएं। इससे भविष्य में लोन लेने में परेशानी हो सकती है।

पीएम मोदी से मिल सकती है बातचीत का मौका

अगर आप पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थी हैं, तो भविष्य में आपको पीएम नरेंद्र मोदी से सीधे बातचीत करने का मौका भी मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने इस योजना के तहत दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक लाख से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को लोन चेक दिए थे, जिससे यह योजना और भी लोकप्रिय हो गई है। अब तक कई लोग इस योजना का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को दोबारा खड़ा कर चुके हैं, और प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन भी कर रहे हैं।


पीएम स्वनिधि योजना सिर्फ एक लोन योजना नहीं है, बल्कि यह छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक साधन है। कम ब्याज दर और बिना जमानत के मिलने वाले लोन के कारण, यह योजना आज हजारों लोगों के लिए एक जीवनदायिनी साबित हो रही है

Leave a Comment

और पढ़ें

संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।