सहारनपुर/यमुनानगर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से 19 फरवरी को सौरभ राणा की बारात यमुनानगर स्थित सौभाग्य रिसॉर्ट पहुंची, जहां पूरे रीति-रिवाजों के साथ विवाह समारोह संपन्न हो रहा था।
विवाह के दौरान गोरे (तिलक) की रस्म निभाई जा रही थी। परंपरा के अनुसार वधू पक्ष की ओर से शगुन स्वरूप 31 लाख रुपये भेंट करने की तैयारी की गई थी। जैसे ही यह राशि दूल्हे सौरभ राणा के सामने रखी गई, उन्होंने हाथ जोड़कर विनम्रता के साथ इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
सौरभ राणा ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है और उन्हें किसी प्रकार की धनराशि की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने केवल लक्ष्मी-गणेश की फोटो और नारियल स्वीकार कर विवाह की रस्म आगे बढ़ाई।
दूल्हे के इस कदम की विवाह समारोह में मौजूद लोगों ने सराहना की। 31 लाख रुपये दहेज लौटाकर सौरभ राणा ने समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।








