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शंकराचार्य चतुरंगिणी गठन की घोषणा, सनातन प्रतीकों की रक्षा और निर्बलों के संरक्षण का संकल्प

वाराणसी । स्थित ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य सचिवालय, श्रीविद्यामठ केदारघाट में 23 मार्च 2026 को ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ के गठन की विधिवत घोषणा की गई। यह पहल परमाराध्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ‘1008’ के नेतृत्व में की जा रही है। इसका उद्देश्य गौ, ब्राह्मण सहित सनातन धर्म के प्रतीकों की रक्षा तथा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े निर्बल सनातनियों की सहायता करना है।

शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शास्त्र-चर्चा पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज को अभय और संरक्षण देने के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।इस संगठन को प्राचीन भारतीय सैन्य परंपरा के आधार पर 9 स्तरीय पदानुक्रम में व्यवस्थित किया जाएगा, जिसमें पत्तिपाल से लेकर महासेनापति तक पद निर्धारित होंगे।

सर्वोच्च स्तर पर परमाध्यक्ष तथा उनके अधीन सर्वाध्यक्ष, सह सर्वाध्यक्ष और संयुक्त सर्वाध्यक्ष होंगे, जिनमें विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।चतुरंगिणी के चार प्रमुख अंग—मनबल, तनबल, जनबल और धनबल—के अंतर्गत कुल 20 विभाग कार्य करेंगे।

मनबल में संत, विद्वान, विधिक व मीडिया क्षेत्र शामिल होंगे, जबकि तनबल प्रत्यक्ष सुरक्षा का दायित्व निभाएगा। जनबल स्वयंसेवकों के माध्यम से सेवा कार्य करेगा और धनबल संसाधनों का आधार बनेगा। संगठन का उद्देश्य सनातन समाज को निर्भय बनाकर धर्म रक्षा के लिए सशक्त करना है।

संजय पांडेय मिडिया प्रभारी।

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