माँ मनसा देवी की आरती एक भक्तिपूर्ण भजन है। जिसमें भक्त माता के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं। माँ मनसा देवी को सर्पों की देवी और इच्छाओं को पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से जीवन की समस्याएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्तगण माँ की स्तुति करते हुए उनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं, ताकि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो सके।
माँ मनसा देवी की आरती में उनकी महिमा और शक्ति का गुणगान किया गया है। आरती में माँ को माता के रूप में पुकारा जाता है और उनके दैवीय स्वरूप की सराहना की जाती है। यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य पावन अवसरों पर गाई जाती है। आरती के माध्यम से भक्त माँ के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं और माँ से जीवन में रक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं।
आरती
जय मनसा माता आरती ; श्री जय मनसा माता;
जो नर तुमको ध्याता; जो नर मैया जी को ध्याता;
मनोवांछित फल पाता;
|| जय मनसा माता||
जरत्कारू मुनि पत्नी; तुम वासुकि भगिनी
कश्यप की तुम कन्या ; आस्तीक की माता;
|| जय मनसा माता ||
सुर नर मुनि जन ध्यावत; सेवत नर नारी
गर्व धन्वंतरि नाशिनी ; हंसवाहिनी देवी
जय नागेश्वरी माता;
|| जय मनसा माता||
पर्वतवासिनी, संकटनाशिनी; अक्षय धनदात्री;
पुत्र पौत्रदायिनि माता ; मन इच्छा फल दाता;
||जय मनसा माता||
मनसा जी की आरती जो कोई नर गाता;
मैया जो जन नित गाता;
कहत शिवानंद स्वामी; रटत हरिहर स्वामी;
सुख संपति पाता;
||जय मनसा माता||









