नर्मदा नदी को हिन्दू धर्म में पवित्र और पूजनीय माना गया है, और इसे देवी नर्मदा के रूप में आदर दिया जाता है। भारत की महत्वपूर्ण नदियों में से एक, नर्मदा मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों के प्रमुख हिस्सों से होकर बहती है और जीवनदायिनी के रूप में जानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में शुद्धता और शांति आती है। भक्तजन नर्मदा की आरती करके उन्हें नमन करते हैं और उनके जल को अमृत के समान पवित्र मानते हैं।
नर्मदा आरती विशेष रूप से नर्मदा नदी के किनारे शाम के समय की जाती है, जब दीपक जलाकर देवी नर्मदा का स्वागत किया जाता है। यह आरती न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि इसके माध्यम से भक्त देवी नर्मदा से कृपा, शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नर्मदा आरती का उद्देश्य नदी को देवी के रूप में सम्मान देना और उसके जल को पवित्र मानकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है।
आरती
ॐ जय जगदानन्दी;
मैया जय आनंद कन्दी |
ब्रह्मा हरिहर शंकर; रेवा
शिव हरि शंकर; रुद्रौ पालन्ती ||
||ॐ जय जगदानन्दी..||
देवी नारद सारद तुम वरदायक;
अभिनव पदण्डी |
सुर नर मुनि जन सेवत;
सुर नर मुनि…
शारद पदवाचन्ती |
|| ॐ जय जगदानन्दी..||
देवी धूमक वाहन राजत;
वीणा वाद्यन्ती|
झुमकत-झुमकत-झुमकत;
झननन झमकत रमती राजन्ती |
|| ॐ जय जगदानन्दी..||
देवी बाजत ताल मृदंगा;
सुर मण्डल रमती |
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान;
तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती |
|| ॐ जय जगदानन्दी..||
देवी सकल भुवन पर आप विराजत;
निशदिन आनन्दी |
गावत गंगा शंकर; सेवत रेवा
शंकर तुम भट मेटन्ती |
|| ॐ जय जगदानन्दी…||
मैयाजी को कंचन थार विराजत;
अगर कपूर बाती |
अमर कंठ में विराजत;
घाटन घाट बिराजत;
कोटि रतन ज्योति |
|| ॐ जय जगदानन्दी..||
मैयाजी की आरती;
निशदिन पढ़ गावरि;
हो रेवा जुग-जुग नरगावे;
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हरि नंद स्वामी मनवांछित पावे|
ॐ जय जगदानन्दी;
मैया जय आनंद कन्दी |
ब्रह्मा हरिहर शंकर; रेवा
शिव हरि शंकर; रुद्रौ पालन्ती ||









