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23 सितंबर का इतिहास: जब बाल विवाह रोकने के लिए बना सारदा एक्ट

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भारत: देश में लड़कियों की शादी की उम्र लंबे समय से बहस का विषय रही है। बाल विवाह रोकने के लिए देश की आजादी के पहले कई सामाजिक आंदोलन हुए और कानूनी प्रावधान बनाए गए। जिसमें शादी की उम्र तय की गई और उसमें बदलाव हुए। मौजूदा बाल विवाह रोकथाम कानून की नींव जहां से पड़ी उसे सारदा एक्ट कहा जाता है।दरअसल, 1927 में न्यायाधीश, राजनेता, शिक्षाविद और समाज सुधारक राय साहब ह‍रबिलास सारदा ने बाल विवाह रोकने का विधेयक पेश किया।

इसमें शादी के लिए लड़कों की न्‍यूनतम उम्र 18 और लड़कियों की 14 साल करने का प्रस्‍ताव था। 1929 में यह कानून बना और इसे ही सारदा एक्‍ट के नाम से जाना जाता है। इस कानून में 1978 में संशोधन हुआ। जिसके बाद लड़कों के लिए शादी की न्‍यूनतम उम्र 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल की गई। साल 2006 में इसकी जगह बाल विवाह रोकथाम कानून लाया गया। इस क़ानून में बाल विवाह कराने वालों के विरुद्ध दंड का भी प्रावधान किया गया।

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