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बिहार भूमि सर्वे: दाखिल-खारिज मामलों की तेजी से निपटान की योजना नवंबर तक 70% लंबित मामलों का समाधान करने का लक्ष्य

बिहार भूमि सर्वे

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बिहार भूमि सर्वे आपको बता दे की आपके बीहार में भूमि से जुड़े भी मामले है न उस सब की सख्या दिन पर दिन बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है जिसके वजह से आप जैसे आम लोग को अपने जमींन से जुड़े प्रक्रिया में देरी का सम्मना करना पड रहा है | आपके राज्सव विभाग और भूमि के सुधार के विभाग ने इन सब समस्या के लिए व्यापक समाधान की योजन को बनाया है इसके तहत नवंबर तक बड़े समय से चल रहे dakhil kharij bihar के जितने भी मामले है लगभग 70 % तक इस मामले का निपटारा कर दिया जाएगा।

इस योजना के तहत अंचल कार्यालय अधिकारियो को यह आदेश दिया गया है की इन सब मामलो को बहुत तेजी से निपटाया जाये और है इसके साथ जो online dakhil kharij प्रक्रिया है उसमे भी सुधार कर के दाखिल ख़ारिज में अब तक जितने भी गलतिया पाई गई है उन सब को जल्दी ठीक करने के लिए व्यवस्था किया गया है| आपको बता दे की पहल उदेश्य क्या है इस का उदेश्य भूमि से जुड़े जितने भी कहासुनी है उन सब को काम करना है और जितने भी जमींन के फाइल्स है उन सबको चालू करना है ताकि भूमि सर्वे आपके जमींन का प्रक्रिया हो रहा वो बिना किसी भी रुकवाट के पूरा हो सके।

भूमि फाइल्स में देरी का मुख्य कारण

आपके राज्य के अलग अलग कार्यालयों में में जितनी भी दाखिल ख़ारिज सबसे ऊपर है ये सब मामले बहुत समय से पड़े हुए है इसकी याकि एक वजह है की ऑनलाइन आवेदन जितने भी थे उन सब की जांच करते समय आवेदन में बहुत सी गलती मिली है यह सुविधा आपको बता दे की पहले अंचल के ही लॉगिन पर उपलबध था इन गलितयों को सुधार कर सके लेकिन है इसके बाद प्रक्रिया को ही बदल दिया जाएगा| आपके जितनी भी आवेदन है उन सब आवेदन को आवेदकों के पास में भेज करके सुधार की व्यवस्था को किया गया है। इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगने के वजह से आपके जितने भी दाखिल-खारिज के मामले है उन सब का निपटारा बहुत ज्यादा धीरे हो गया है।

अब आपके सरकार ने इस सब समस्या के समाधान के लिए सॉफ्टवेयर में सुधार को कर दिया है ताकि आपके ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा किया जा सके। इसमें गलती की जांच मॉड्यूल लागू को करने से पहले आपके जितने भी आवेदन है उन सब की गलतियों को अंचल अधिकारी के लॉग-इन से ही सुधारा जा सकता है, जैसा की पहले होता था। इसके अलावा, परिमार्जन प्लस पोर्टल पर बहुत समय से मामलों का निपटान बहुत तेजी से करने का आदेश दिया हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि के जितने भी फाइल है वो सब चालू और जमीन सर्वे की प्रक्रिया में कोई भी रुकावट न आए।

परिमार्जन प्लस पोर्टल: लंबित जमाबंदी को ऑनलाइन करने की चुनौती

आपके को बता दे रहे है की परिमार्जन प्लस पोर्टल पर बहुत समय से जमाबंदी के मामलों का निपटारा जितना भी है सब धीरे धीरे हो रहा है। आप सब के लिए यह भी एक बहुत बडा वजह है कि आपके भूमि का फाइल ही अपडेट नहीं हो पा रहा हैं। इन सब के वजह से आप सब के जमीन सर्वे की प्रक्रिया में बहुत लेट हो रहा है, क्योंकि वास्तविक में आप सब किसान के जरिये से स्वघोषणा पत्र दाखिल करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

आपके राज्य सरकार ने सभी अंचल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिया है कि वो परिमार्जन प्लस पोर्टल पर बहुत समय से 50 प्रतिशत मामलों का निपटारा अक्टूबर के अंत तक कर लिया जाये । यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आपके जमीन का फाइल चालू हो सकें और सर्वे के समय आप सब किसानो को अपने जमीन के संबंध में स्पष्ट रूप से जानकारी देने में कोई भी परेशानी न हो।


आपके बिहार में भूमि सर्वे और दाखिल-खारिज के बहुत समय से मामलों को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने एक जरुरी पहल को किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज के करीब छह लाख मामले लंबित हैं, जिनका निपटान तेजी से करने की योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य है कि नवंबर तक 70% यानी लगभग चार लाख मामलों का निपटारा कर दिया जाए। इसके साथ ही, परिमार्जन प्लस पोर्टल पर बहुत समय से जमाबंदी के मामलों को भी तेजी से निपटाने का आदेश दिया गया हैं, ताकि जमीन से जुड़े फाइल्स समय पर चालू हो सकें और सर्वे प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरा हो सके।

दाखिल-खारिज प्रक्रिया में तेजी के लिए नए सुधार

दाखिल-खारिज के मामलों में तेजी लाने के लिए आपके सरकार ने एक और बहुत जरुरी कदम को उठाया है। सॉफ्टवेयर में किए गए सुधारों के जरिए से गलती को जल्द से जल्द दूर करने के लिए व्यवस्था को किया गया है। अब गलती की जांच मॉड्यूल लागू होने से पहले जितने भी आवेदन है उन सब की गलती अधिकारी के लॉग-इन पर ही सुधारने के लिए सुविधा को दिया गया है। इससे क्या है की आवेदकों को बार-बार आवेदन लौटाना नहीं पड़ेगा और उन्हें संशोधित करने की प्रक्रिया मे जो समय लगने वाला है वो सब काम हो जाएगा और दाखिल-खारिज के मामलों का निपटान बहुत जल्दी हो जाएगा ।

इन सब के संबंध में आपके राजस्व और भूमि के सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी करने का बहुत जरुरी आदेश दिया है , ताकि वो अपने अंचल अधिकारियों को इन सुधारों से अवगत करा सके और दाखिल-खारिज के जितने भी मामलों है उन सब के निपटारे में तेजी लाया जा सके।

अंचल कार्यालयों में खुलापन और निरीक्षण में सुधार

आपके भूमि के जितने भी फाइल्स है उन सब प्रक्रियाओं का निपटारा हो सके, अंचल कार्यालयों के निरीक्षण कामो में खुलापन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी राज्य सरकार ने इस कदम को उठाए हैं। इसके लिए एक खाश पोर्टल को विकसित किया गया है, जो की अंचल अधिकारियों के ऑनलाइन रिपोर्टिंग लॉग-इन में उपलब्ध है। इस पोर्टल पर राजस्व से जुड़े कामो की प्रगति अंचल कार्यालय के रजिस्टरों की स्थिति और अन्य जुड़े आंकड़ों की एंट्री की जा रही है।

सरकार ने अंचल अधिकारियों को आदेश दिया गया हैं कि वो नियमित रूप से अपने कार्यालय का स्व-निरीक्षण करें और इस जानकारी को अपने पोर्टल पर अपलोड करें। इससे क्या है की राजस्व के कामो की प्रगति को ट्रैक किया जा सकेगा और दाखिल-खारिज के मामलों में देरी की समस्या को जल्द से जल्द सुलझाया जा सकेगा।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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