भगवान ब्रह्मा जिन्हें कि हम सृष्टि का रचनाकार भी मानते हैं जो कि हमारे हिंदू धर्म में त्रिमूर्ति में से एक है वह सृष्टि के उत्पत्ति मतलब की विकास और विकास के जिम्मेदार हैं भगवान ब्रह्मा जी का जो वर्णन है वह वेदों और पुराणों में विस्तृत रूप से किया गया है जहां पर की ब्रह्मा जी को चार मुख और चार हाथों के साथ चित्रित किया जाता है मतलब उनके बारे में बात किया जाता है यह जो ज्ञान है और बुद्धि के देवता है और भगवान ब्रह्मा के प्रति भी भक्ति प्रकट करने का एक बहुत ही जरूरी तरीका है उनका आरती गाना है इस आरती के जरिए से आप सभी भक्त भगवान ब्रह्मा से सृष्टि के लिए आशीर्वाद और मार्गदर्शन मतलब की रास्ता दिखाने के लिए भी प्रार्थना कर सकते हैं।
ब्रह्मा जी की जो आरती है उसकोगाकर आप सभी भक्त अपने मन को शांत और अच्छाइयों से भर सकते हैं या जो आते हैं भक्ति और श्रद्धा का भी प्रतीक माना गया है जिसे कि आप गाकर के अपने जीवन में ज्ञान और समझ को बढ़ाने के लिए कोशिश कर सकते हैं साधारण शब्दों में ही लिखा गया है यह आरती हर एक व्यक्ति चाहे वह कोई भी हो वह आसानी से इस आरती को गा सकता है ब्रह्मा जी के जो आती है उसका अगर नियमित रूप से दान करते हैं तो आपके जीवन में चालनात्मक सफलता और समृद्धि का संचार होगा इस प्रकार से जो ब्रह्मा जी की आरती है भक्ति का एक सशक्त जरिया है जो कि आप सभी भक्तों को आत्मिक संतोष और शांति प्रदान करता है।
आरती
पितु मातु सहायक स्वामी सखा;
तुम ही एक नाथ हमारे हो |
जिनके कुछ और आधार नहीं;
तिनके तुम ही रखवारे हो |
सब भॉति सदा सुखदायक हो;
दुख निर्गुण नाशन हरे हो |
प्रतिपाल करे सारे जग को;
अतिशय करुणा उर धारे हो |
भूल गये हैं हम तो तुमको;
तुम तो हमरी सुधि नहिं बिसारे हो |
उपकारन को कछु अंत नहीं;
छिन्न ही छिन्न जो विस्तारे हो |
महाराज महा महिमा तुम्हारी;
मुझसे विरले बुधवारे हो |
शुभ शांति निकेतन प्रेम निधि;
मन मंदिर के उजियारे हो |
इस जीवन के तुम ही जीवन हो;
इन प्राणण के तुम प्यारे हो में |
तुम सों प्रभु पये “कमल” हरि;
केहि के अब और सहारे हो |
|| इति श्री ब्रह्मा आरती ||









