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मारकुंडी घाटी में वर्षभर से पड़ा मलबा, जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी से बढ़ा खतरा

ओबरा (सोनभद्र)। जनपद के प्रमुख आवागमन मार्ग मारकुंडी घाटी में मारकुंडी पहाड़ी से लगभग एक वर्ष पूर्व बरसात के दौरान गिरे पत्थर एवं मलबा आज भी सड़क के किनारे तथा आंशिक रूप से मार्ग पर मौजूद है। यह स्थिति प्रतिदिन स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, जहां बड़े बड़े पत्थरों के कारण मार्ग संकरा हो गया है और भारी वाहनों के आवागमन के बीच दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।

चिंताजनक बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी मलबा हटाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर केवल मलबे पर छोटे-छोटे परावर्तक (रेडियम) चिन्ह लगा दिए गए हैं, जो किसी स्थायी समाधान का विकल्प नहीं हैं।

यह मार्ग जनपद का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से प्रतिदिन आम नागरिकों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी आवागमन होता है। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी रहना जिम्मेदार तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

एक ओर लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लोढ़ी शुल्क नाका पर प्रत्येक वर्ष शुल्क में वृद्धि की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क की मूलभूत सुरक्षा एवं रखरखाव की अनदेखी की जा रही है। यह विरोधाभास सीधे तौर पर संबंधित विभाग एवं एजेंसियों की जवाबदेही को दर्शाता है।

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