सोनभद्र। 2026 में प्रस्तावित जनगणना में आदिवासी धर्म के लिए अलग कॉलम शामिल किए जाने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों और रोजगार सामाजिक अधिकार अभियान ने आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में 10 मार्च को लखनऊ स्थित ईको गार्डन में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग भाग लेंगे।
आदिवासी समाज का कहना है कि भारत में वर्ष 1871 से शुरू हुई जनगणना में 1951 तक आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कॉलम की व्यवस्था थी, जिससे उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान दर्ज होती थी। लेकिन 1961 की जनगणना से यह कॉलम हटा दिया गया। इसके बाद से आदिवासी समाज की अलग धार्मिक पहचान को आधिकारिक तौर पर दर्ज करने की व्यवस्था समाप्त हो गई, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है।

आदिवासी समुदाय का मानना है कि उनकी अपनी अलग आस्था, परंपराएं और जीवन पद्धति है, जिसे किसी अन्य धर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसलिए जनगणना में अलग “आदिवासी धर्म कॉलम” का प्रावधान जरूरी है, ताकि उनकी वास्तविक जनसंख्या और पहचान का सही आकलन हो सके।कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया गया।

इस अभियान में पिंटू आदिवासी, इंजीनियर राम कृष्ण बैगा, प्रधान योगेन्द्र गोंड, द्वारिका प्रसाद गोड़ और रविशंकर गोड़ सहित कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।









