गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के तत्वाधान में जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में मंगलवार को पीरनगर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने देश के प्रथम राष्ट्रपति, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं संविधान सभा के अध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की एकता-अखंडता तथा संविधान की रक्षा का संकल्प लिया।
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सरकार डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपेक्षा कर रही है और वोटों की राजनीति में व्यस्त है। संविधान दिवस पर भी देश और प्रदेश की सरकारें उनके योगदान को याद करना उचित नहीं समझीं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण पर झूठा इतिहास परोसा जा रहा है और किसी भी राजनीतिक दल ने राजेंद्र बाबू की भूमिका का उल्लेख नहीं किया, जिससे पूरा कायस्थ समाज आहत और आक्रोशित है।
उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे शुचिता, विद्वता, सरलता और सादगी के प्रतीक थे। महात्मा गांधी के अत्यंत प्रिय होने के कारण उन्हें ‘बिहार का गांधी’ भी कहा गया। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके पास अपना निजी आवास तक नहीं था और उन्होंने बिहार कांग्रेस कमेटी के सदाकत आश्रम को निवास के रूप में चुन लिया। उनका जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इस दौरान जिलाध्यक्ष ने स्वतंत्रता संग्राम के युवा क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस को भी नमन किया और कहा कि वे देश की आज़ादी के लिए फांसी पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सभासद परवेज अहमद, पियूष, मनीष श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव उर्फ राजन श्रीवास्तव, विवेक श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
ब्यूरोचीफ – संजय यादव









