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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भव्य पथ संचलन, 2100 स्वयंसेवकों ने अनुशासन और संगठन शक्ति का प्रदर्शन किया

बलिया। 18 मार्च 2016चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (वर्ष प्रतिपदा) एवं भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बलिया द्वारा नगर में एक भव्य एवं अनुशासित पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में लगभग 2100 गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर संगठन की एकरूपता, अनुशासन और शक्ति का प्रभावी प्रदर्शन किया।नगर के तीन अलग-अलग स्थानों—पूर्व, पश्चिम और उत्तर क्षेत्रों—से शाखाओं के स्वयंसेवक निर्धारित स्थलों पर एकत्रित हुए।

तत्पश्चात तीनों दिशाओं से संचलन एक साथ प्रारंभ हुआ, जो चित्तू पांडेय चौराहा एवं रेलवे स्टेशन मार्ग से होते हुए लक्ष्मी राज देवी इंटर कॉलेज के मैदान में पहुँचा। वहाँ कार्यक्रम का समापन बौद्धिक सत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत आद्य सरसंघचालक प्रणाम एवं ध्वजारोपण से हुई।अतिथि परिचय, अमृतवचन एवं एकल गीत के उपरांत मुख्य वक्ता के रूप में गोरक्ष प्रांत के सह प्रांत प्रचारक सुरजीत जी ने अपना मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी सूरज गुप्ता ने की। मंच पर सह जिला संघचालक डॉ. विनोद, नगर संघचालक परमेश्वरन सहित अन्य पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।अपने उद्बोधन में सुरजीत जी ने भारतीय नववर्ष के सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से संगठित होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिकता, संस्कृति और जीवन-दर्शन से है। भारत को समझने के लिए सुनना, देखना और अनुभव करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का अवसर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष भर में छह प्रमुख उत्सव मनाए जाते हैं, जिनमें वर्ष प्रतिपदा, गुरु पूर्णिमा, विजयादशमी और मकर संक्रांति प्रमुख हैं।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना, भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का निर्णय, भगवान झूलेलाल का जन्म, आर्य समाज की स्थापना तथा विक्रम संवत का प्रारंभ माना जाता है। इसी दिन संघ संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म भी हुआ था।

भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गति पर आधारित एक सटीक प्रणाली है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देती है। पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इसके प्रमुख अंग हैं।कार्यक्रम के अध्यक्ष सूरज गुप्ता ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में अनुशासन, समरसता और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करते हैं।

कार्यक्रम का संचालन अरुण मणि जी ने किया, जबकि अमृत वचन संतोष जी, एकल गीत हरनाम जी एवं प्रार्थना सौरभ जी द्वारा प्रस्तुत की गई। मुख्य शिक्षक चंद्रशेखर जी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।इस अवसर पर अंबेश, अखिलेश्वर, प्रवीण, सौरभ पांडेय, मारुतिनंदन, अनुज सरावगी, निधेश अग्रवाल, धर्मेंद्र सिंह, अनिल सिंह, ओमप्रकाश, संजय कश्यप, चंदन जी, संतोष तिवारी सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की संपूर्ण जानकारी जिला प्रचार प्रमुख उमेश द्वारा दी गई। यह आयोजन अत्यंत अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने सभी उपस्थितजनों पर गहरी छाप छोड़ी।

सजय सिंह रिपोर्टर बलिया।

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