मरीज के बेटे इरफान खान का ब्लड के लिए दुबई से आया फोन
सोनभद्र। पवित्र रमजान के महीने में मानव सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। दुबई में रहने वाले एक बेटे ने अपनी बीमार मां के लिए मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद स्थानीय लोगों और ब्लड बैंक की मदद से दुर्लभ रक्त समूह का इंतजाम कर मरीज की जान बचाने की कोशिश की गई।
मानव सेवा सर्वोपरि के उद्देश्य से चल रही “जिंदगी बचाने की मुहिम” के तहत एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई। नूरिया मोहल्ला, अनपरा के निवासी इरफान खान का फोन दुबई से आया। उन्होंने बताया कि उनकी 58 वर्षीय मां ऑडी मोड़ स्थित सद्भावना हॉस्पिटल, अनपरा में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर है।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को तुरंत ए नेगेटिव (A-Negative) जैसे अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप की दो यूनिट रक्त की आवश्यकता है। परिवार के लोग पिछले दो-तीन दिनों से लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन कहीं भी ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस वजह से पूरा परिवार काफी परेशान और चिंतित था।
किसी परिचित के माध्यम से इरफान खान को मदद के लिए संपर्क नंबर मिला। फोन पर सूचना मिलते ही तुरंत ब्लड डोनर की तलाश शुरू की गई, लेकिन शुरुआत में किसी से संपर्क नहीं हो पाया।
इसके बाद जिला ब्लड बैंक के काउंसलर डॉ. रविंद्र प्रसाद से संपर्क किया गया और पूरी स्थिति बताई गई। जानकारी मिली कि ब्लड बैंक में इस दुर्लभ ग्रुप की केवल एक यूनिट रक्त उपलब्ध है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उस यूनिट को तुरंत मरीज के लिए रिजर्व करा दिया गया।
इसके बाद मरीज के परिजन सुनौवर खान से संपर्क किया गया और उन्हें सलाह दी गई कि वे मरीज का ब्लड सैंपल और डिमांड लेटर लेकर जिला ब्लड बैंक पहुंचें। सुनौवर खान अनपरा से बाइक द्वारा रॉबर्ट्सगंज स्थित जिला ब्लड बैंक पहुंचे।
सुनौवर खान स्वयं रक्तदान करना चाहते थे, लेकिन उस समय वे रोजा रखे हुए थे और लंबी दूरी बाइक चलाकर आए थे। उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें रक्तदान करने से मना कर दिया गया और ब्लड बैंक के डोनर कार्ड के माध्यम से आवश्यक रक्त उपलब्ध करा दिया गया।
साथ ही उनसे निवेदन किया गया कि जब भी अनपरा में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगे, तब वे एक नहीं बल्कि दो यूनिट रक्तदान कर इस सेवा में योगदान दें।
इस घटना ने लोगों को यह संदेश दिया कि समय पर किया गया छोटा सा प्रयास भी किसी की जिंदगी बचा सकता है। दुर्लभ रक्त समूह होने के कारण अक्सर मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पाता। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि अगर समाज के लोग इसी तरह आगे आएं तो किसी भी मरीज को रक्त की कमी से परेशानी नहीं होगी।
स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक के अधिकारियों का भी कहना है कि लोगों को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में भाग लेना चाहिए। इससे ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त उपलब्ध रहता है और जरूरत पड़ने पर मरीजों की तुरंत मदद की जा सकती है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
रमजान के पवित्र महीने में सामने आई यह घटना इंसानियत और सेवा भावना का सुंदर उदाहरण है। यह हमें याद दिलाती है कि रक्तदान महादान है और इससे किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है। इसलिए जब भी मौका मिले, स्वेच्छा से रक्तदान करें और समाज में मानवता की इस सेवा को आगे बढ़ाएं।








