नवरात्रि 2024 आपके भारत में नवरात्रि का पर्व खास रूप से देवी पूजा के लिए माना जाता है इस पर्व के समय भक्तगण जो है वह मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं जिनमें से एक प्रमुख रूप है माता का महागौरी। महागौरी माता को सफेद रंग से बहुत प्रेम है जो शुद्धता और शांति का प्रतीक है उनका यह स्वरूप दिव्या और आकर्षक है और जो भी भक्त है उनके सभी दुखों का निवारण माता रानी करती है नवरात्रि के आखिरी तीन दिन में उनका खास पूजा होता है जिस्म की भक्त उनके प्रति अपने श्रद्धा भाव को उनके सामने व्यक्त करते हैं।
महागौरी माता की पूजा का विधि बहुत आसान और सहज है नवरात्रि 2024 पूजा के लिए सबसे पहले एक सांप स्थान पर लाल कपड़ा को बढ़ा ले उसके बाद मां महागौरी का चित्र या फिर मूर्ति को स्थापित कर ले ध्यान से उन्हें फूल माला और मिठाई को अर्पित करना ना भूले इसके बाद मंत्र उच्चारण करते हुए माता से आशीर्वाद मांगे। “ॐ महागौरी नमः” इस मंत्र का जाप खास रूप से किया जाता है वक्त इस दिन उपवास रखकर मां की कृपा को प्राप्त करने की कोशिश करते हैं इस पूजा से हर एक व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है।
महागौरी माता का महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी माता का पूजा बहुत खास महत्व है नवरात्रि 2024 इन्हें नवदुर्गा में से एक आठवीं देवी के रूप में माना जाता है महागौरी माता माता पार्वती का एक दिव्य रूप है जिनका पूजा करने से आपके जीवन में सुख और समृद्धि आता है कहा जाता है कि महागौरी माता का जिसकी शक्ति के ऊपर कृपा करता है वह हमेशा परेशानी से मुक्त रहता है।
महागौरी माता का बहुत स्वरूप है अत्यंत आकर्षक है उनका रंग गौर है और माता को सफेद रंग बहुत पसंद है वह सफेद रंग के वस्त्र ही पहनती है उनके चार भुजा होते हैं जिनमें से एक में अध्याय मुद्रा और दूसरे में त्रिशूल होता है उनका वाहन है बेल जिससे कि उनकी शक्ति और भी ज्यादा बढ़ जाती है कुंवारी कन्या इस दिन महागौरी माता की पूजा करके मनचाहा वर प्राप्त कर सकती हैं।
पूजा विधि
तैयारी: आप पूजा करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन ले। उसके बाद घर को साफ सुथरा करके माता की चौकी पर महागौरी की मूर्ति या फिर फोटो को स्थापित कर ले।
पूजा का आयोजन
- फूल और दीपक से अपने मंदिर को सजा ले।
- उसके बाद धूप दीप फूल फल मिठाई चंदन रोली अच्छा इत्यादि चढ़ाए।
- उसके बाद महागौरी माता को प्रसन्न करने के लिए आप खास मंत्र का जाप करें।
- पूजा खत्म करने के बाद आखिरी में माता की आरती करे और व्रत की कथा का पाठ कर ले।
- पूजा खत्म होने के बाद आप गरीबों और जरूरतमंद लोगों को प्रसाद का दान जरूर करें।
महागौरी माता का मंत्र
आप महागौरी माता का प्रसन्न करने के लिए मंत्र का जाप करें।
ॐ देवी महागौर्यै नमः
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
महागौरी माता की कथा
मां गौरी माता का कथा देवीभागवत पुराण में लिखा हुआ है देवी पार्वती ने अपने तपस्या के समय के कंदमूल फल और पत्तों का ही आहार किया था बाद में उन्होंने केवल हवा पीकर तब करना शुरू किया उसके बाद माता की इस कठिन तपस्या से उन्हें महान गौरव प्राप्त हुआ और उनका नाम महागौरी पड़ गया।
जब माता पार्वती ने गंगा में स्नान किया था तब उनके स्वरूप में एक उज्जवल रूप प्रकट हुआ था जिसे महागौरी कहा गया है माता गौरी अपने भक्तों का कल्याण करती हैं और जो भी उनकी समस्या रहती है उनसे वह मुक्ति दिलाती हैं।
महागौरी माता का स्वरूप
महागौरी माता का रंग गौर और वस्त्र सफेद होता है उनका वहां जो है वृषभ है जो भगवान शिव का भी वहां है देवी का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रहता है जबकि नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है उनके हाथ में डमरू भी है जो कि उन्हें शिव के नाम से भी जानने का वजह बनता है उनके जो उनके भक्त हैं शांत और कल्याणकारी ईश्वर रूप की प्रार्थना करते हैं
शरणागति का मंत्र
इस दिन भक्तजन कहते हैं:
सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।
कन्या पूजन का महत्व
महागौरी माता की पूजा के दिन कन्या पूजन का भी खास महत्व है जो भक्तजन है इस दिन कन्याओं को आमंत्रित करते हैं और उनकी पूजा भी करते हैं अगर कन्याओं की संख्या ना हो तो या खास रूप से बहुत अच्छा है माना जाता है। नवरात्रि 2024 हालांकि दो कन्याओं के साथ भी पूजा किया जा सकता है इस दिन माता को नारियल का भी भोग लगाने की परंपरा है जिसे बाद में प्रसाद के रूप में बाटा भी जाता है।
नवरात्रि का पूर्णत्व
महागौरी माता की पूजा सी केवल आप सबके जीवन में सुख शांति और समृद्धि का वृद्धि होता है बल्कि यह भी माना जाता है कि माता रानी की कृपा से आपकी जो भी बड़ा है उससे मुक्ति मिलती है जो लोग पूरे नवरात्रि का व्रत नहीं रख पाते है तो आप पहले और आठवें दिन का व्रत करके सभी लाभ को प्राप्त कर सकते हैं।









