शारदीय नवरात्रि के समय मां दुर्गा के 9 स्वरूप की पूजा होती है जिसमें की अष्टमी और नामी तिथि को कन्या पूजन का खास महत्व इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को देवी के रूप में मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए इसे कंजक पूजन भी कहते हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन करने से मां दुर्गा बहुत प्रसन्न होती है और घर में सुख समृद्धि का वास भी होता है।
इस साल 2024 में पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रहा है जिससे कि हमारे मन में कन्या पूजन के सही समय को लेकर के संभव हो सकता है ऐसे में सही विधि से पूजन करना और समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है इस लेख में हम जानेंगे कि कन्या पूजन का सही विधि क्या है इसका धार्मिक महत्व क्या है और इसे करने से कौन-कौन से लाभ मिलेंगे।
कन्या पूजन की विधि: कैसे करें सही तरीके से पूजन
कन्या पूजन नवरात्रि के आठवें दिन मतलब अष्टमी या नवमी के दिन करते हैं इस दिन भक्त छोटी-छोटी कन्याओं को देवी के रूप में मानकर उसकी पूजा करेंगे इस साल पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रहा है जिससे कि हमारे मन कुछ भ्रम की स्थिति भी हो गई है।
कन्या पूजन का सही दिन
अगर हम सप्तमी का व्रत रखते हैं तो हमारे लिए कन्या पूजन का समय 11 अक्टूबर शुक्रवार को दोपहर 12:06 बजे तक रहेगा वही जो हम अष्टमी का व्रत रखते हैं और नवमी को पूजन करते हैं तो हमारे लिए पूजन 12 अक्टूबर शनिवार को सुबह 10:58 बजे तक रहेगा इस दिन के बाद विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है।
कन्याओं का चयन
कन्या पूजन के लिए हम दो से 10 साल की कन्याओं का चयन कर सकते हैं जो की नवदुर्गा की प्रतीक माना जाता है ध्यान में रखेंगे की 10 साल से ज्यादा आयु की कन्या को पूजन में शामिल नहीं करना है।
कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
कन्या पूजन का महत्व देवी भागवत में विस्तार रूप से बताया गया है इसमें यह कहा गया है कि नौ कन्या जिन्हें हम कुमारी भी कहते हैं मां दुर्गा के 9 स्वरूप की प्रति मूर्ति है यह कन्याएं प्रतीक है उन शक्तियों का जो मां दुर्गा के अलग-अलग रूप में प्रकट होते हैं उनका पूजन करने से न केवल मां दुर्गा खुश होती है बल्कि हमारे जीवन में सुख समृद्धि और शांति का भी वास होता है।
मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्रि के आठवें दिन हम मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं मां महागौरी को शांति और सौभाग्य की देवी कहते हैं वही मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सीढ़ियां का वरदान देती है इन दोनों दिनों में कन्या पूजन करना बहुत फलदाई है।
देवी भागवत के अनुसार
देवी भागवत पुराण के अनुसार कन्या पूजन के बिना मां दुर्गा का पूजा हमेशा अधूरा माना जाता है नौ कन्या का पूजा करने से ही देवी के सभी रूप की कृपा प्राप्त होगा और हमारे जीवन में सभी प्रकार के बधाओ का भी नाश होगा।
कन्या पूजन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
कन्या का पूजन करते समय कुछ खास नियमों का पालन करना है ताकि पूजा का संपूर्ण लाभ हमें मिल सके।
1. पूजन सामग्री का ध्यान: हम कन्याओं को पूरी, चना, हलवा और नारियल का भोग चढ़ाएंगे या भोग मां दुर्गा को चढ़ाया जाता है फिर उन कन्याओं को परोसा जाएगा।
2. कन्याओं का आदर: करते समय उन्हें देवी के स्वरूप में मन करके पूरे आदर और सत्कार से भोजन खिलाए इसके बाद उन्हें उपहार या वस्त्र भेंट देकर के कन्याओं को विदा उनके पैर को छू करके आशीर्वाद प्राप्त करें यह बहुत जरूरी है।
3. आशीर्वाद का महत्व: कन्याओं से आशीर्वाद लेते समय उनके हाथों से अक्षत लेकर के अपने घर में छिड़काव लेंगे उसे इससे क्या है कि घर में सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कन्या पूजन के लाभ
कन्या पूजन से हमारे जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन होता है इसे करने से मां दुर्गा का खास कृपा प्राप्त होता है हमें जीवन में किसी भी प्रकार का बड़ा हो वह दूर हो जाता है साथ ही घर में हमारे हमेशा शांति समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।
सुख-समृद्धि का वास
धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है वहां देवी लक्ष्मी का भी पास होता है और उसे घर में कभी भी धन स्वास्थ्य या शांति की कभी कमी नहीं होती है।
आध्यात्मिक विकास
कन्या पूजन सी केवल भौतिक सुख मिलता है बल्कि यह आत्मिक शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग दिखाता है।
नवरात्रि में कन्या पूजन का खास स्थान
नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व इसलिए है क्योंकि मां दुर्गा को कन्याओं का स्वरूप माना जाता है और उनका पूजा करने से हमारे जीवन में देवी के सभी नौ रूपों की कृपा बनी रहती है यह पर्व शक्ति संपन्न और समाधान का प्रतीक है इसलिए नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हम कन्याओं का पूजन करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करके कर्तव्य पूरा करते हैं।








