नवरात्र के पांचवे दिन का महत्व: माता स्कंदमाता को पका केला चढ़ाए


नवरात्रि के पांचवें दिन का महत्व आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं नवरात्र के पांचवें दिन का खास महत्व है क्योंकि हम इस दिन माता के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा करते हैं स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है और हम उनकी कृपा से ज्ञान समृद्धि और शांति को प्राप्त करते हैं इस दिन हम जैसे श्रद्धालु माता को पका हुआ केला चढ़ाते हैं जो की धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ और फलदाई माना जाता है पके हुए केले का भोग चढ़ाने से घर में सुख समृद्धि और शांति का वास होता है साथ ही हम जैसे भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है।

मातास्कंद की पूजा से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है हम इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे विधि विधान के साथ माता का पूजा करते हैं मंदिर और पंडाल में देवी के स्वरूप को सजा करके खास रूप से पूजा करते हैं जहां पर महिला और बच्चों का भी भारी उपस्थित होता है। स्कंदमाता का कृपा सांसारिक बंधनों से मुक्त और जीवन में नव चेतना का अनुभव होता है जिससे कि हमारा जीवन सुखमय और शांति बना रहता है।

साहेबगंज का उत्साह और श्रद्धा

साहिबगंज में शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन का महत्व माता के पांचवे स्वरुप स्कंद माता का पूजा बहुत बड़ी श्रद्धा में धूमधाम से किया जाता है इस दिन हम माता को पका हुआ केला अर्पित करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं श्रद्धालु के लिए या दिन खास है क्योंकि स्कंद माता का पूजा जीवन में हमारे सुख शांति और समृद्धि का संचार करता है। स्कंदमाता की महिमा को सुनने के लिए आचार्य निरंजन पांडे ने भी बताया है कि यह देवी पहाड़ों पर विराजमान रहकर सांसारिक जीवन के जीवन में नव चेतना का निर्माण करती है।

स्कंदमाता की महिमा और कथा

आचार्य पांडे जी ने स्कंदमाता के महिमा पर प्रकाश डालते हुए गया कहा है कि हमारी माता स्कंदमाता ज्ञान और सम्राट की प्रतीक है जो भी स्कंदमाता का पूजा करेगा उसके जीवन में ज्ञान का प्रकाश डालेगा और मूर्ख भी विद्वान बन सकता है। या देवी भगवान कार्तिकेय की माता है और उनकी कृपा से हमारे सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है। स्कंद माता की आराधना करने से न केवल हमे शारीरिक सुख मिलता है बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी होता है।

पके केले का भोग और उसका महत्व

हम नवरात्रि के पांचवा दिन माता को पके हुए केले का खास रूप से भोग चढ़ाते हैं इस बुक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है पके हुए केले को शुभ और पवित्र माना जाता है और हम इसे देवी को अर्पित करते हैं ताकि हमारे सभी मनोकामना पूरी हो इस दिन हम उपवास रखते हैं और माता को केले के साथ अन्य मिठाई का भी भोग लगा सकते हैं पके हुए केले का भोग चढ़ाने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है और हर काम में सफलता मिलता है।

साहेबगंज के मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

साहिबगंज के अलग-अलग मंदिरों में नवरात्र के पांचवें दिन का पूजा अर्चना के लिए भारी भीड़ लगती है मां मनसा देवी मंदिर और आदत बाजार में भी दुर्गा स्थान में दुर्गा परिवार की स्थाई प्रतिमा को विराजमान किया जाता है जहां पर खास रूप से पूजा का आयोजन हुआ है मंदिर में आग जैसे श्रद्धालु ने दीप प्रचलित करके माता से आशीर्वाद को प्राप्त किया है शाम होते ही पूजा पंडाल में किशोरियों और महिलाओं की भीड़ भी बढ़ जाती है सभी ने देवी देवताओं की आरती में भाग लिया है और भक्ति गीतों से माहौल को और भक्ति में बना दिया गया है।

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पंडालों में सजी धूमधाम और सजावट

साहिबगंज में पूजा पंडाल में नवरात्रि की धूमधाम से चरण पर है पंडालून को रंग-बिरंगे फूलों और लाइट से देवी की सुंदर मूर्तियां को भी सजा दिया जाता है हम जैसे भक्तजन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप के दर्शन करते हैं और अपने श्रद्धा को प्रकट करते हैं बच्चों से लेकर के बुजुर्ग तक हर कोई देवी की आराधना में क्लीन हो जाता है पंडाल की साथ साज – सज्जा और भक्ति भावना का वातावरण हर एक को अपनी ओर आकर्षित करता है।

मंदिरों में महिलाओं और किशोरियों की बढ़ती भागीदारी

इस खास अवसर पर मंदिर में महिला और किशोरियों की भागीदारी भी देखने लायक होती है हर शाम को दीपक प्रज्वलित के समय महिला बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच जाती है। और हमारी माता की आरती करती है पूजा के समय महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में साजिद की नजर आते हैं जो कि इस धार्मिक योजना को और भी ज्यादा खास बना देती है। किशोरियों ने भी अपने उपस्थिति को दर्ज कराया है और हमारे माता के चरण में को पुष्प अर्पित किया है।

साहेबगंज में नवरात्र के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

हमारे साहिबगंज में नवरात्र के इस पावन अवसर पर कई ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है माता की आराधना के साथ-साथ कथा, वाचन, कीर्तन और खास रूप से पूजा पाठ का भी आयोजन होता है। स्थानीय कलाकारों ने धार्मिक नाटकों और संगीत प्रस्तुतियों के जरिए से देवी की महिमा का गुणगान गया है श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और इस धार्मिक वातावरण का आनंद लिया है।

नवरात्र का महत्व और आस्था

नवरात्रि हिंदू धर्म में एक खास महत्व है यह पर 9 दिन तक चलता है जिसमें कि हम देवी के नौ रूपों की पूजा करते हैं हम जैसे भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है नवरात्र के समय उपवास, पूजा पाठ और भोग का खास महत्व है। यह समय हमारा हमारे देवी को समर्पित है और हम जैसे भक्त अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ माता का आशिर्वाद लेते हैं।

संपूर्ण साहेबगंज में धार्मिकता का माहौल

हमारे साहेबगंज में नवरात्र के पांचवें दिन का महत्व है पूजा के समय पूरे शहर में धार्मिकता का माहौल बना रहता है। जगह-जगह से माता के भव्य पंडाल और सजावट नजर आती हैं लोग माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं और हर कोई देवी माता के आशीर्वाद के कामना करता है इस धार्मिक माहौल में हम जैसे भक्त जनों ने अपने श्रद्धा को प्रकट किया है और देवी माता की महिमा का गुणगान गया है।

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