ओबरा, 7 अप्रैल 2026: सोनभद्र जनपद में रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में मंगलवार को ओबरा रेलवे स्टेशन से गाड़ी संख्या 13379/80 धनबाद–लोकमान्य तिलक टर्मिनस (मुंबई) साप्ताहिक एक्सप्रेस का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर माननीय सांसद छोटेलाल खरवार ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया।

यह सेवा लंबे समय से जनपद की मांग रही है, जिसे सांसद द्वारा बजट सत्र के दौरान संसद में उठाए जाने के बाद शुरू किया गया। चार राज्यों से घिरे सोनभद्र जनपद में रेल ठहराव और सीधी कनेक्टिविटी के अभाव के कारण यात्रियों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
रेलवे के निर्धारित समय के अनुसार ट्रेन का आगमन प्रातः 08:10 बजे तय है, हालांकि उद्घाटन के दिन यह लगभग 09:15 बजे स्टेशन पहुंची। इस सेवा के प्रारंभ होने से विशेष रूप से मुंबई जाने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, उद्घाटन कार्यक्रम के बीच ही स्टेशन परिसर की जमीनी स्थिति ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। सीएसआर फंड से निर्मित सार्वजनिक शौचालय लंबे समय से बंद पाया गया, जिसे उद्घाटन के दिन भी चालू नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त स्टेशन पर पीने के पानी की समुचित व्यवस्था का अभाव भी देखने को मिला, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्टेशन के समीप स्थित रेलवे गैरेज में कार्यरत श्रमिकों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां मालगाड़ियों की मरम्मत कार्य में लगे वेल्डर एवं हेल्पर श्रमिकों को अत्यंत कम पारिश्रमिक दिए जाने का मामला सामने आया है। श्रमिकों के अनुसार हेल्परों को लगभग ₹300 और वेल्डरों को ₹430 प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है, जबकि उनसे पूरे महीने बिना साप्ताहिक अवकाश के कार्य कराया जाता है।
इसके साथ ही श्रमिकों ने सुरक्षा उपकरणों के अभाव और कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि शिकायत करने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है, जिससे वे मजबूरी में कार्य करने को विवश हैं।
इस पूरे प्रकरण को लेकर माननीय सांसद को मौके पर ही शिकायती पत्र सौंपा गया, जिस पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से डिवीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर (DPM) को आवश्यक निर्देश दिए। अब इन निर्देशों के बाद सुधार की वास्तविक स्थिति क्या होती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
वहीं, जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की एक प्रमुख समस्या पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने की भी बनी हुई है। इसके कारण ग्रामीण यात्रियों को निजी वाहनों में भीड़भाड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर पैसेंजर ट्रेन संचालन को जनपद की मूल आवश्यकता बताया जा रहा है, जिस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
इस प्रकार जहां एक ओर नई ट्रेन सेवा की शुरुआत से कनेक्टिविटी में सुधार की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर स्टेशन की बदहाल व्यवस्थाएं और श्रमिकों की समस्याएं तत्काल सुधार की मांग कर रही हैं।








