गाजीपुर। नन्दगंज। शहीदी दिवस के पावन अवसर पर नारी पंचदेवरा में अमर क्रांतिकारियों शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर की स्मृति में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण “इंकलाब जिंदाबाद” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इन वीर सपूतों का बलिदान देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है और यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण का संदेश देता रहेगा।

वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि 23 मार्च 1931 को अंग्रेजी शासन ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर चढ़ा दिया था, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण है।
गोष्ठी में भगत सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था और उन्होंने किशोरावस्था में ही देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेने के बाद उनका झुकाव क्रांतिकारी विचारधारा की ओर हुआ और उन्होंने 1926 में ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना की।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भगत सिंह एक निर्भीक क्रांतिकारी होने के साथ-साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी, प्रखर वक्ता और लेखक भी थे। उन्होंने ‘अकाली’ और ‘कीर्ति’ जैसे पत्रों का संपादन किया तथा जेल में 64 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया, जिसमें उनके साथी यतीन्द्रनाथ दास ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।सभा में केंद्रीय असेंबली बम कांड और लाहौर षड्यंत्र का भी उल्लेख किया गया।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में शहीदों को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पूर्व डीआईजी बलिकरन यादव, जिलाध्यक्ष सुजीत यादव सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उमेश यादव गाजीपुर।








