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भाजपा स्थापना वर्ष गांठ पर काव्य संध्या में हुआ राष्ट्र वंदन

देश विरोधी हर ताकत की हस्ती हमें मिटानी है, जिस इंसान का खून न खौला खून नहीं वह पानी है – कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान

सोनभद्र। इमिरती कालोनी राबर्ट्सगंज में भाजपाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा कमलेश सिंह खांबे के आवास पर उनके आयोजकत्व में सोमवार को भाजपा बर्ष गांठ के उपलक्ष्य में काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने राष्ट्र वंदन कर एक से बढ़कर एक वीर रस, हास्य, श्रृंगार, ओज राष्ट्र वाद, गीत, गजल, छंद, नज्म सुनाकर वाहवाही लूटते रहे। मुख्य अतिथि पूर्व जिला भाजपाध्यक्ष डॉक्टर धर्मवीर तिवारी व अन्य भाजपा नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर भारत भारती के चित्र पर माल्यार्पण किया।


विधिवत कार्यक्रम का आगाज सुशील मिश्रा अध्यक्ष सोन संगीत फाउंडेशन के वाणी वंदना, माई सारद अइली तोहरे दुअरिया, लेतू आ खबरिया हो से वातावरण सृजित हुआ। ओज राष्ट्र वाद की प्रखर कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने, देश विरोधी हर ताकत की हस्ती हमें मिटानी है, जिस इंसान का खून न खौला खून नहीं वह पानी है सुनाकर महफ़िल में शमां रौशन की और राष्ट्र वंदन कर आयोजन में चार चांद लगाया।


शहीद स्थल करारी प्रमुख प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने अपनी कालजयी रचना, वंदेमातरम वंदेमातरम वंदेमातरम बानी, पहिरि केसरिया झूलले फांसी नाहर हिंदुस्तानी सुनाकर वाहवाही लूटी और लोगों में देशभक्ति का जोश भर दिया। अटल जी को समर्पित रचना फूल से भी कोमल पाहन से सख्त थे अंत: करण विशुद्ध था भारत के भक्त थे देते रहे आहुति इस हवन कुंड में शेखर सुभाष बिस्मिल भगत सिंह के रक्त थे सुनाकर श्रद्धांजलि दी।

आयोजन की अध्यक्षता करते हुए शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने अटल जी को समर्पित बेहतरीन रचना, दिल में हिंदोस्तान रखता था पांव जमींन में सर पे आसमान रखता था, अंधेरों के बढते हुए सन्नाटे में, वो एक शख्श था जो मुंह में जुबान रखता था। सुनाकर वाहवाही लूटी सराहे गये। सफल संचालन करते हुए राष्ट्र वाद के प्रहरी प्रभात सिंह चंदेल ने, जय जगत जननी जन्म भू धन्य वीर वसुंधरा,तन प्राण है तुझपर निछावर और यह जीवन मेरा सुनाकर देर तक जय हिंद का उद्घोष कराते रहे।

गीतकार धर्मेश चौहान एडवोकेट ने, उन वीर सपूतों को हमारा कोटि कोटि नमन, जिनका जीवन सिर्फ त्याग और बलिदान के लिए सुनाकर आयोजन को गतिज उर्जा दी सराहे गये। सुनील चौचक ने हास्य व्यंग्य की रचना, जेबा कटि गैल थाने में सुनाकर लोगों को खूब हंसाते रहे। बासी भात पर बेना जिनि हौंका,बनल बाप के बिगरल बेटवा एतना मति फौंका, तंज कसकर लोगों को खूब रिझाया।
लोकभाषा कवि दयानंद दयालू ने पर्यावरण पर उजड़ल जाता बाग बगैचा लागै सूना सूना सुनाकर लोगों को सोचने पर विवस कर पर्यावरण के प्रति सचेत किया।

नवगीतकार दिलीप सिंह दीपक ने, वीर शहीदों को समर्पित रचना बुजुर्गों ने लहू देकर रक्खी है आबरू इसकी तो वहीं विवेक चतुर्वेदी शायर ने समझते हो अगर कमजोर हमको, चलो फिर जंग हो जाये दुबारा सुनाकर भारत माता के विरुद्ध सोंच रखने वालों को ललकारा सराहना पाई। सभी कवियों का सारस्वत अभिनंदन किया गया।

आयोजक कमलेश सिंह खांबे ने आभार व्यक्त करते हुए अनेक शेर ओ शायरी सुनाकर आयोजन को शिर्ष पर पहुंचाया तो वहीं मुख्य अतिथि डा, धर्मवीर तिवारी एडवोकेट पूर्व जिला भाजपाध्यक्ष ने सभी कवियों की रचना को साधकों की साधना से देश वंदना का पुष्प निरंतर पल्लवित पुष्पित हो इस संकल्प के साथ भारतीय जनता पार्टी के वर्ष गांठ पर सबको बधाई देते हुए सम सामयिक चिंतन वक्तव्य देकर आयोजन को विराम दिया गया।

इस अवसर पर लालता प्रसाद मिश्र, दिलीप चौबे, ऋषभ, हर्ष, अनीशा, जयशंकर त्रिपाठी एडवोकेट, देवानंद पांडेय, गुलाम हुसैन, शिवम आदि लोग रहे।

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