कात्यायनी देवी पूजा आज हम आपसे नवरात्रि के छठवें दिन देवी का अध्ययन की पूजा के बारे में बात करने जा रहे हैं इस पूजा खास महत्व है देवी दुर्गा के इस स्वरूप को शक्ति और प्रताप की देवी माना जाता है पौराणिक कथाओं के मानता है कि ऋषि कात्यान के घर में जन्म लेने की वजह से उनका नाम कात्यायनी पड़ गया मां कात्यायनी का पूजा करने से हर एक व्यक्ति के सभी पाप खत्म हो जाते हैं और उसे धर्म, अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है आप सब भक्तों का यही मानता है की मां कात्यायनी का जो उपासना करता है उसके जीवन में सभी संकट दूर हो जाते हैं अंततः मोझ का रास्ता खुल जाता है।
मां कात्यायनी का तेजस्वी और स्वामी स्वरूप हर किसी को अपनी और खींचता है वो चार भुजा वाली देवी है जो की सिंह पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में अभय और वरदान मुद्रा के साथ तलवार और कमल का भी पुष्प रहता है उनकी पूजा में श्रद्धालु खासतौर पर पीले रंग के वस्त्र को धारण करते हैं और पीले रंग की मिठाई का भी भोग लगाते हैं मां कात्यायनी की उपासना से आपके जीवन में सुख शांति और समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।
मां कात्यायनी का स्वरूप और महत्त्व
मां कात्यायनी पूजा का रूप बेहद तेजस्वी और उज्ज्वल है। वे चार भुजाओं वाली देवी हैं। दाईं ओर के ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा और नीचे के हाथ में वरदान मुद्रा है। बाईं ओर के हाथ में तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। वे सिंह पर सवार रहती हैं, जो उनकी शक्ति और साहस का प्रतीक है। मां कात्यायनी की पूजा से भक्त को आत्मशुद्धि, मोक्ष और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
- सूर्यवोदय से आप पहले स्नान करके पिले साफ वस्त्र धराड़ कर ले क्युकी हमारी माँ को पीला रंग बहुत ज्यादा पसंद हैं।
- उसके बाद आप ; पूजा वाले स्थान को गंगाजल जल से झिडकाव करके शुद्धि कर ले फिर उसके बाद माँ का ध्यान करे।
- पूजा को सुरु करने से पहले आप कलश स्थापना करके पूजन करे।
- अब आप मां कात्यायनी का मंत्र जपते हुए उन्हें वस्त्र अर्पित करें।
- अब आप घी का दीपक जलाएं और रोली का तिलक, अक्षत, धूप और पीले फूल अर्पित करें।
- आप मां को पान के पत्ते पर शहद लगाकर, बताशे और लौंग के साथ अर्पित करें।
- अंत में कपूर जलाकर मां की आरती करें और समर्पण भाव से पूजा संपन्न करें।
मंत्र और उनका महत्व
मां कात्यायनी की पूजा में मंत्रों का खास महत्तव है इस मंत्र का जो भी जाप करेगा उसका सारा कास्ट दूर हो जाएगा उस व्यक्ति को शांति और सुरछा और सफलता भी मिलता है इस मंत्र माँ कात्यायनी प्रस्सन होती है
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
इस मंत्र का जाप करते समय मां कात्यायनी के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा और विश्वास प्रकट करें। यह मंत्र न केवल जीवन में सुख-संपत्ति की प्राप्ति करता है, बल्कि व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्त भी करता है।
मां कात्यायनी का भोग
मां कात्यायनी को पीला रंग बहुत ही ज्यादा पसंद है इसलिए आप सब पूजा के समय पिले रंग की मिठाई चढ़ाये बहुत ही सुबह माना जाता है खास रूप आप पूजा में शहद का इस्तेमाल करे आप माँ को शहद से बना हुआ हलवा ही चढ़ाये ये मिठास का प्रतीक होता है। सूजी के हलवे में शहद मिलाकर भी आप मां को अर्पित कर सकते हैं।
मां कात्यायनी की आरती
पूजा करने के बाद आपको माँ की आरती करनी है जो भी व्यक्ति माँ की आरती करता है श्रद्धा भाव को दिखता है माँ कात्यायनी की आरती बहुत ही खास होता है इससे आप की सभी इच्छा पूरी होती है
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
यह आरती जो भी व्यक्ति मां का त्यागी के समझ करता है तो उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार रहता है मां की आराधना से आप सब भक्त के जीवन में हर प्रकार के पापों का नाश होता है और आपको मोक्ष का प्राप्त हो जाता है।
मां कात्यायनी के जन्म की कथा
मां कात्यायनी के जन्म की कथा बहुत ही प्रेरणायक है विश्व प्रसिद्ध ऋषि कात्यायन ने मां भगवती का कठिन तपस्या किए थे जब मां भगवती ने उन्हें दर्शन दिया तो उन्होंने यह वरदान मांगा था की मां भगवती स्वर उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म ले ले मां भगवती ने उनकी इच्छा को पूरा किया और ऋषि का अध्ययन के घर पर वह जन्म ले ली इस वजह से इनका नाम कात्यायनी पड़ गया।
इस कथा से यह संदेश मिलता है कि जो सच्ची भक्ति और तपस्या करता है उसकी सभी इच्छा पूरी हो सकती है मां कात्यायनी की पूजा से जो भक्तजन है उनके जीवन में कोई भी दुख नहीं रहता वह दुख से मुक्ति पा लेते हैं और जीवन में चारों पुरुषार्थ -धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं।
नवरात्रि के छठे दिन का विशेष महत्त्व
कृष्ण भक्ति और गोपियों की आराधना: भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पानी की इच्छा रखने वाली गोपियों ने भी मां कात्यायनी के आराधना की थे तो उनकी पूजा से उन सब गोपियों की मनोकामना पूरी हुई थी मां का अत्यावनी की जो भक्त है वह केवल मोक्ष और मार्ग को प्रसन्न नहीं करती बल्कि सांसारिक इच्छाओं की भी पूर्ति का भी जरिया है।
नवरात्रि के छठे दिन का आध्यात्मिक महत्त्व
मोक्ष प्राप्ति की राह: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने का उद्देश्य यह है कि आत्म शुद्धि और मौज की प्राप्ति होती है जो भी मन की पूजा करता है उन्हें जीवन के सभी कासन से मुक्ति मिलती है यह दिन खास रूप से उन लोगों के लिए मोक्ष की कामना करते हैं आसान बंधनों से मुक्त होना चाहते है।








