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वाराणसी में 3.54 लाख नौनिहालों को मिला इम्यूनिटी बूस्टर

4 दिसम्बर से 11 जनवरी तक चला अभियान
यह खुराक 6 माह में एक बार लक्षित बच्चों को पिलायी जाती है

वाराणसी: जनपद में नौनिहालों को कुपोषण से मुक्त रखने के लिए ‘विटामिन ए सम्पूरण’ कार्यक्रम बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत 4 दिसम्बर से हुई थी, जोकि 11 जनवरी तक चला।

ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी व यूएचएसएनडी) सत्रों के जरिये 9 माह से 5 वर्ष तक के कुल 3.88 लाख बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया था। इस क्रम में विगत 5 माह एवं अभियान के दौरान 3.54 लाख बच्चों ने विटामिन ए की खुराक ली है| यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने दी।


उन्होंने बताया कि यह अभियान बुधवार एवं शनिवार को आयोजित होने वाले ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस सत्रों के अतिरिक्त सोमवार को भी विटामिन-ए का आच्छादन किया गया।

यह खुराक 6 माह में एक बार लक्षित बच्चों को पिलाई जाती है। अभियान के दौरान पूर्ण टीकाकरण (24 माह तक), सम्पूर्ण टीकाकरण, वजन लेना और अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करना, सभी बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाना, एक घंटे के अंदर और छह माह तक सिर्फ स्तनपान को लेकर जन जागरूकता, आयोडीन युक्त की नमक के सेवन के प्रति जागरूक किया गया। अभियान के दौरान सात माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों को आयरन सीरप भी पिलाया गया।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एके मौर्या ने बताया कि पहली खुराक 9 से 12 माह के बीच एमआर 1 टीके के साथ दूसरी खुराक 16 से 24 माह के बीच एमआर 2 टीके के साथ तथा तीसरी से 9 वीं खुराक 6-6 महीने के अंतराल पर ‘विटामिन ए सम्पूरण’ अभियान के अंतर्गत पिलायी गयी।

9 माह से 1 वर्ष तक के बच्चे को आधा चम्मच (1 एमएल) तथा 1 से 5 वर्ष तक के बच्चे को 1 पूरा चम्मच (2 एमएल) विटामिन ए की खुराक पिलाई गयी।

उन्होंने बताया कि विटामिन ‘ए’ की कमी से बच्चों में नजर का कमजोर होना, रात्रि के समय कम दिखाई देना, अंधेपन का शिकार हो जाना, रूखी आँख, रूखी त्वचा और त्वचा से संबन्धित समस्या सहित निमोनिया और डायरिया से निजात मिल जाती है।

इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, साथ ही यह बच्चों में हड्डी के विकास, झिल्ली (म्युकोसा) के विकास में सहायक होता है। इसलिए बच्चों को विटामिन ए की खुराक देना बेहद आवश्यक है।

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