काशी के महाश्मशान हरिश्चचंद्र घाट पर आज चिता भस्म की होली खेली गई। भूत-पिशाच, योगिनी, भैरव, रौद्र रूप में काली, नरमुंड की माला पहने अघोरी, गले में नाग लपेटे विशाल नंदी पर सवार महाकाल शोभायात्रा निकली। शिव बारात के रूप में तांडव करते हुए 2 किमी दूर घाट पहुंचें। रास्ते में कलाकार मुंह से आग की लपटें उगलें। श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच करीब 2500 किलो चिता भस्म की होली खेली गई।

सुबह 10 बजे से शुरू होकर करीब 4 घंटे ये तांडव चला। इस खास उत्सव को देखने के लिए 20 देशों से करीब 5 लाख टूरिस्ट काशी पहुंचे हैं। कमेटी ने महिलाओं को होली में शामिल होने की इजाजत नहीं दी है। हरिश्चंद्र घाट पर चिता भस्म के होली का आयोजन करने वाले पवन कुमार चौधरी ने बताया- सुबह 10 बजे अघोरपीठ बाबा कीनाराम आश्रम से बारात निकली। अघोरपीठ बाबा कीनाराम, कालूराम, बाबा मसान नाथ की तस्वीर बग्घी पर रही।

डमरू दल के साथ घोड़े पर भोलेनाथ के 5 स्वरूप रहें। कई झांकियों के साथ ढोल-नगाड़ा, बैंड पार्टी शामिल हुई।रास्ते भर भूत-पिशाच के रूप में सन्यासी और कलाकार तांडव करते हुए दोपहर करीब 12 बजे घाट पहुंचें। बारात कीनाराम जन्मस्थल से शुरू होकर आईपी विजया, भेलूपुर थाना होते हुए सोनारपुर से हरिश्चंद्र घाट पहुंची। यहां बाबा मसान नाथ का भव्य श्रृंगार और आरती की गई। यहां नागा सन्यासी, अघोरी चिता भस्म की होली खेलें।
इसके लिए 25 क्विंटल चिता भस्म की व्यवस्था की गई है। काशी की चिता भस्म की होली देखने और फोटोशूट के लिए 20 देश से टूरिस्ट पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह उत्सव दुनिया में सबसे अलग है। इसके लिए हमें सालभर इंतजार करना पड़ता है। करीब 2 किलोमीटर लंबी निकलने वाली इस यात्रा में लगभग 20 हजार लोग शामिल हुए है। घाट तक पहुंचते-पहुंचते 2 लाख लोग जुट गए।
बाल्मीकि ने बताया- हम 25 साल से घाट पर मसाने की होली की व्यवस्था देखते आ रहे हैं। तांडव करने वाले भूत-पिशाचों में मुंबई और साउथ इंडिया के कलाकार शामिल होंगे। इसमें सभी लोग बाबा के बाराती की तरह शामिल होते हैं। इस आयोजन की तैयारी 6 महीने पहले से होती है। चिताओं की राख इकट्ठा की जाती है। जिसे भस्म के साथ होली के दिन उड़ाया जाता है।









