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वाराणसी: शास्त्री घाट पर पेंशनर्स व शिक्षकों का धरना, पुरानी पेंशन योजना सहित कई मांगों को लेकर जताया रोष

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन तथा शिक्षक महासंघ के बैनर तले मंगलवार को शास्त्री घाट पर पेंशनरों और शिक्षकों ने संयुक्त रूप से धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पेंशनरों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को हुए धरने में केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसलिए पुनः सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए आज 15 जुलाई 2025 को अनुस्मारक धरना दिया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 25 मार्च 2025 को पारित वित्त विधेयक (फाइनेंशियल बिल) के माध्यम से सिविल सर्विसेज पेंशनर रूल में संशोधन कर आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों पर लागू होने से रोक दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की दोहरी नीति के कारण पेंशनर वृद्धावस्था में भी सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।

धरने में यह भी कहा गया कि सरकार ने जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक आयोग में किसी भी सदस्य की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठता है। प्रदर्शनकारियों ने फाइनेंशियल बिल (सीसीएस संशोधन) को वापस लेने की मांग की।

इसके अलावा, पेंशनरों ने कम्युटेशन राशि की 15 वर्षों तक की कटौती को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पेंशनर सरकार से ली गई राशि ब्याज सहित 10 वर्षों में चुका देता है, तो फिर 15 वर्षों तक कटौती करना कल्याणकारी सरकार की नीति पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

धरने में यह भी मुद्दा उठाया गया कि वर्तमान समय में सेवारत कर्मचारी एनपीएस और यूपीएस जैसी जटिल योजनाओं में उलझ गए हैं, जिससे उन्हें भविष्य को लेकर आशंका बनी रहती है। इसीलिए पेंशनरों और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से लागू करने और उसे भविष्य निधि (पीएफ) से जोड़ने की मांग की।

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