वाराणसी: ओड़िशा में एबीवीपी से जुड़ी एक छात्रा द्वारा शिक्षक पर मानसिक और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्मदाह करने की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश है। इसी क्रम में मंगलवार को एनएसयूआई वाराणसी इकाई द्वारा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शशांक शेखर ने कहा कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के “बेटी बचाओ” अभियान की असलियत को उजागर करती है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देते हैं, वहीं ओड़िशा में भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण एबीवीपी से जुड़ी एक छात्रा न्याय न मिलने से मजबूर होकर खुद को आग लगाने पर विवश हो गई।”
एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि पीड़िता बार-बार प्रशासन और शासन से न्याय की गुहार लगाती रही, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एबीवीपी जैसी संगठन की सदस्य सुरक्षित नहीं है, तो आम छात्राओं और बेटियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार की कथित दोहरी नीति, महिला सुरक्षा के प्रति उदासीनता और आरोपी शिक्षक पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई न होने को लेकर तीखी आलोचना की।
इस मौके पर एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष ऋषभ पांडेय, जिलाध्यक्ष शशांक सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप पाल, इकाई अध्यक्ष गौतम शर्मा, आदर्श सोनकर, नमन राय, रोनिक सोनकर सहित कई छात्र नेता उपस्थित रहे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी शिक्षक पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और पीड़िता को न्याय नहीं मिला, तो एनएसयूआई राज्यभर में आंदोलन को और तेज करेगा।









