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गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में 20 नवंबर से एमआरआई जांच सेवा शुरू – प्रो. डॉ. आनंद मिश्रा

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गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज गाजीपुर में आधुनिक एमआरआई मशीन से स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा 20 नवंबर से शुरू हो गई है। इसकी जानकारी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. आनंद मिश्रा ने पूर्वांचल न्यूज डॉट कॉम से बातचीत में दी।

प्रो. मिश्रा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लगभग पांच वर्ष हो चुके हैं और एमआरआई मशीन लगाने को लेकर कॉलेज प्रशासन पिछले दो वर्षों से लगातार प्रयासरत था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के सहयोग से फरवरी 2024 में शासन से मशीन की स्वीकृति मिली। इसके बाद अप्रैल से प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया था।

नवंबर में सफल परीक्षण के बाद यह सुविधा 20 नवंबर से आम जनता के लिए समर्पित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक एमआरआई मशीन पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा सीएसआर के तहत प्रदान की गई है। कॉलेज में एमआरआई की सभी जांचें उचित और निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध होंगी।

एमआरआई सेवा शुरू होने से जिले के हजारों मरीजों को अब बाहर न जाकर स्थानीय स्तर पर ही सटीक जांच की सुविधा मिल सकेगी।

ब्यूरो चीफ गाजीपुर – संजय यादव

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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