हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को राज्य कांग्रेस की कार्यकारी बैठक में पार्टी की आंतरिक विविधता का उदाहरण देते हुए हिंदू धार्मिक मान्यताओं और देवताओं की विविधता का संदर्भ दिया। उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है और भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया है।
रेवंत रेड्डी ने क्या कहा?
बैठक को संबोधित करते हुए सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस हर तरह के विचारों और पृष्ठभूमि वाले लोगों को साथ लेकर चलती है। उन्होंने कहा “कांग्रेस हर तरह के लोगों को साथ लेकर चलती है। कोई भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करता है, कोई हनुमान की। जब देवी-देवताओं पर सहमति नहीं बन पाती, तो राजनीतिक नेताओं और डीसीसी अध्यक्षों पर सहमति बनना भी आसान नहीं।”
उन्होंने आगे हिंदू धार्मिक मान्यताओं में विविधता का जिक्र करते हुए कहा “हिंदू कितने देवताओं में विश्वास करते हैं? क्या वे तीन करोड़ हैं? इतने देवता क्यों हैं? कुंवारों के लिए एक देवता हैं हनुमान, दो बार शादी करने वालों के लिए दूसरे देवता। जो शराब पीते हैं, उनके लिए अलग देवता। मुर्गे की बलि के लिए एक देवता, हर समुदाय का अपना देवता है।”
रेवंत रेड्डी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना कांग्रेस में नए जिला कांग्रेस समिति (DCC) अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर असंतोष की खबरें हैं।
BJP का पलटवार
तेलंगाना के BJP नेताओं — केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और सांसद संजय कुमार — ने मुख्यमंत्री के बयान को “हिंदू समुदाय का अपमान” बताया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि AIMIM से नजदीकियों और मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति के चलते सीएम “हिंदुओं और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी” कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा:
“तेलंगाना में हिंदुओं के एकजुट होने का समय आ गया है। रेवंत रेड्डी और कांग्रेस को हिंदुओं की शक्ति दिखानी होगी।” BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री के पुराने बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, “कांग्रेस मतलब मुसलमान और मुसलमान मतलब कांग्रेस।”
राजनीतिक तापमान बढ़ा
रेवंत रेड्डी के बयान ने राज्य की राजनीति में गर्मी ला दी है। जहां कांग्रेस इसे “सांप्रदायिक सौहार्द और विविधता का उदाहरण” बता रही है, वहीं भाजपा इसे चुनावी अवसर के रूप में उपयोग करते हुए सरकार पर हमला तेज कर रही है।









