गाजीपुर। विकासखंड मुहम्मदाबाद अंतर्गत शक्करपुर गांव के ग्रामीणों के लिए रेलवे की दोहरी लाइन पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। वर्षों से रेलवे अंडरपास की मांग कर रहे ग्रामीणों को अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। इसे रेलवे अधिकारियों की लापरवाही कहें या ग्रामीणों का दुर्भाग्य, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग के बावजूद रेल मंडल वाराणसी द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधी जा रही है। हालांकि बीते महीनों में ग्रामीणों की शिकायत पर रेलवे के सेक्शन इंजीनियर (कार्य), गाजीपुर ने मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि जिस स्थान पर अंडरपास की मांग की जा रही है, वहां डाउन लाइन की ओर केवल 10.97 मीटर भूमि उपलब्ध है, जबकि अप लाइन की ओर 18.08 मीटर जमीन है।
रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार अंडरपास निर्माण के लिए डाउन लाइन की तरफ 4.6 + 6.0 = 10.6 मीटर जगह की आवश्यकता होगी, लेकिन इसके बाद अप्रोच रोड के लिए रेलवे की भूमि शेष नहीं बचती। इसी आधार पर रेलवे ने अंडरपास निर्माण में तकनीकी अड़चन बताई है। यह जानकारी रेलवे की ओर से अजीत कुमार पाण्डेय को उनके शिकायती पत्र संख्या MORLY/E/2025/003025 के जवाब में दी गई।
रेलवे के इस जवाब से असंतुष्ट ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश के साथ मिलकर उपजिलाधिकारी से मुलाकात की और गांव में आने-जाने के लिए अंडरपास के साथ अप्रोच मार्ग को समायोजित करने की मांग रखी। इसके बाद हल्का लेखपाल ने मौके का निरीक्षण कर अप्रोच मार्ग से संबंधित दस्तावेजों सहित रिपोर्ट उपजिलाधिकारी को सौंपी। उपजिलाधिकारी ने मामले को जिलाधिकारी गाजीपुर को प्रेषित करने की बात कही।
इधर रेलवे मंडल कार्यालय वाराणसी का कहना है कि अंडरपास का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और जांच के बाद स्वीकृति मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रक्रिया काफी धीमी है और जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेलवे की जांच प्रक्रिया धीमी है या जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते ग्रामीणों की जान जोखिम में डाली जा रही है?
शक्करपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी गाजीपुर से मांग की है कि दोहरी रेल लाइन से उत्पन्न खतरे को देखते हुए SBK–GCT के मध्य 120/01 पर प्रस्तावित 2.5 मीटर अंडरपास को शीघ्र स्वीकृति दिलाकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।










