अजमेर। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसे सोमवार को सुनवाई के दौरान स्वीकार कर लिया गया। याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील एपी सिंह के माध्यम से प्रस्तुत की गई थी।
याचिका में दावा किया गया है कि दरगाह के भीतर महादेव मंदिर था, जिसे आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया और उसके स्थान पर दरगाह का निर्माण किया गया। इसमें अयोध्या, काशी, संभल और सोमनाथ की तरह ही अजमेर में स्थित महादेव मंदिर के ध्वंस का उल्लेख करते हुए राजस्व दस्तावेज भी पेश किए गए हैं।
सिविल कोर्ट ने राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग, केंद्र के मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी। परमार और एपी सिंह ने बताया कि वे अदालत में सभी प्रमाणों और दस्तावेजों के साथ याचिका का पक्ष रखेंगे।









