Varanasi: रामनगर किला में बुधवार की देर रात्रि में रामलीला के मुख्य पात्रों की कोट विदाई की परंपरा निभाई गई। काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह ने उनको दुर्ग में आमंत्रित कर उनका राजसी आतिथ्य सत्कार किया। हाथी गेट के पास आयोजित कोट विदाई की रस्म में उन्होंने पात्रों को आसन पर बैठा कर उनके चरण पखारने के पश्चात कुंवर साहब ने अपने हाथों से जलपान परोस कर भोग लगाने का अनुरोध किया।
रामायणियों ने रामचरितमानस के उत्तर कांड के शेष बचे दोहों का गायन शुरू किया। भोजन ग्रहण करने के बाद कुंवर ने माला पहनाकर पात्रों की आरती की। विदाई प्राप्त कर मुख्य स्वरुप हाथियों पर सवार होकर दुर्ग से वापस अयोध्या राम लीला मैदान पहुंचें। यहां पर रामायणियों ने उत्तरकांड के शेष बचे दोहों का गायन समाप्त किया। उसकी समाप्ति के बाद मुख्य पात्रों की आरती के साथ रामलीला का औपचारिक समापन हो गया।
इस अंतिम आरती में राजपरिवार का कोई भी सदस्य नहीं उपस्थित नहीं रहता है। इसके साथ ही एक महीने तक चली रामनगर की रामलीला का बुधवार की देर रात समापन हो गया। नम आंखों से लीला प्रेमियों ने एक-दूसरे से विदा ली। लेकिन इस वादे के साथ कि अगर प्रभु चाहेंगे तो अगले साल फिर मिलना होगा।









