सोनभद्र। पिपरी नगर पंचायत के वार्ड नंबर 12 स्थित श्मशान घाट परिसर में मंगलवार की शाम एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन में सुंदरकांड पाठ, गंगा आरती और मशाने की होली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति और आस्था का परिचय दिया।
मंगलवार की शाम पिपरी नगर पंचायत क्षेत्र का श्मशान घाट परिसर धार्मिक माहौल से भर गया। यहां एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी तैयारी पहले से ही बड़े स्तर पर की गई थी। कार्यक्रम में नगर क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
आयोजन स्थल को दीपों और फूलों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर आकर्षक और शांतिपूर्ण दिखाई दे रहा था। जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, वातावरण में भक्ति की भावना स्पष्ट दिखाई देने लगी।
कार्यक्रम का आरंभ सुंदरकांड पाठ से किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे मन से पाठ में भाग लिया और भजन-कीर्तन के साथ भगवान राम का स्मरण किया। समय-समय पर “जय श्री राम” के जयकारे भी लगाए गए, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
इसके बाद गंगा आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया। वहां मौजूद लोगों को ऐसा महसूस हुआ मानो वे काशी के किसी प्रसिद्ध घाट पर आरती देख रहे हों।
कार्यक्रम का एक खास हिस्सा मशाने की होली भी रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से अबीर और गुलाल लगाकर होली की खुशियां मनाईं। यह आयोजन धार्मिक परंपरा और होली के उत्सव का एक अलग और खास रूप बनकर सामने आया।
इस आयोजन में शामिल हुए लोगों ने इसे बहुत खास और यादगार बताया। उनका कहना था कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रम लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं और समाज में प्रेम, भाईचारे और आस्था को मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति की ओर से उपस्थित अतिथियों और श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देते हैं।
अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। नगरवासियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं जीवित बनी रहें।








