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यूपी बोर्ड परीक्षा पर लगा महाकुंभ का ग्रहण, दिसंबर-जनवरी में होंगे प्रैक्टिकल, 54 लाख से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

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वाराणसी: प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले महाकुंभ के कारण इस बार उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं का शेड्यूल बदल सकता है। महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके चलते फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं करवाना संभव नहीं दिख रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड परीक्षाएं 26 फरवरी के बाद मार्च में आयोजित की जा सकती हैं।  

महाकुंभ की वजह से परीक्षा शेड्यूल में बदलाव 

पिछले 5 वर्षों में यूपी बोर्ड ने फरवरी में परीक्षाएं आयोजित की हैं। केवल 2022 में कोविड-19 के कारण परीक्षाएं मार्च में हुई थीं। इस बार महाकुंभ के आयोजन के कारण बोर्ड एक बार फिर मार्च में परीक्षा आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।  

प्रैक्टिकल परीक्षाएं दिसंबर-जनवरी में 

बोर्ड ने कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षाएं दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच करवाने का फैसला किया है। थ्योरी परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान जल्द ही शासन की अनुमति के बाद किया जाएगा।  

सीसीटीवी की निगरानी में होगी परीक्षा

बोर्ड इस बार भी नकलविहीन परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगा। परीक्षा कक्षों की निगरानी मंडल और राज्य स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाएगी।  

54 लाख से अधिक छात्र देंगे परीक्षा 

इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं के लिए 54,38,597 छात्रों ने नामांकन कराया है। इसमें 27,40,151 छात्र हाई स्कूल के हैं, जबकि 26,98,446 छात्र इंटरमीडिएट में शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए बोर्ड व्यवस्थाओं को सख्त और व्यवस्थित बनाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, नकल रोकने और परीक्षाओं को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए सख्त इंतजाम किए जा रहे हैं।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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