जर्मनी। कहते हैं किस्मत कब, कहाँ और कैसे पलट जाए—कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक वाकया जर्मनी में हुआ, जहाँ एक साधारण, परेशान और अनमना सा दिखने वाला भारतीय युवक अचानक सुर्खियों में आ गया। उसकी एक अनजानी सी तस्वीर ने न केवल पूरे जर्मनी को उसकी तलाश में लगा दिया, बल्कि उसकी जिंदगी भी हमेशा के लिए बदल दी।
यह तस्वीर जर्मनी की एक मेट्रो में खींची गई थी, जिसमें वह भारतीय युवक मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री मेसी विलियम्स (गेम ऑफ़ थ्रोन्स की आर्या स्टार्क) के ठीक बगल में बैठा दिखाई दे रहा था। फोटो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई, लेकिन इसकी असल कहानी उससे भी ज्यादा दिल छू लेने वाली थी।
तस्वीर के वायरल होने के बाद जर्मनी की मशहूर मैगज़ीन “डेर स्पीगल” ने उस भारतीय युवक की तलाश शुरू की। कई दिनों के बाद यह खोज म्यूनिख में जाकर खत्म हुई, जहाँ पता चला कि वह युवक पिछले कई महीनों से ग़ैर-क़ानूनी तरीके से जर्मनी में रह रहा था। उसके पास न रहने का परमिट था, न जेब में पैसे, और वह हर दिन ट्रेन में बिना टिकट सफर करने के लिए मजबूर था।
जब पत्रकारों ने उससे पूछा कि “क्या तुम्हें पता था कि तुम्हारे बगल में बैठी लड़की मेसी विलियम्स थी? दुनिया भर में लोग उसके साथ एक फोटो के लिए तरसते हैं, और तुम बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुए… क्यों?”
उस युवक ने बेहद शांत आवाज़ में जवाब दिया “जब जेब में एक भी यूरो न हो, सिर पर छत न हो, और दिल में डर हो कि पुलिस कभी भी पकड़ लेगी… तब ये मायने नहीं रखता कि तुम्हारे बगल में कौन बैठा है।”
उसकी सादगी, उसकी ईमानदारी और संघर्ष की कहानी ने मैगज़ीन की टीम को भीतर तक छू लिया। उसी वक्त “डेर स्पीगल” ने उसे 800 यूरो महीना वेतन पर पोस्टमैन की नौकरी ऑफर कर दी। नौकरी मिलते ही उसे तत्काल रेगुलर रेसिडेंस परमिट भी मंजूर हो गया—वह कागज़ जिसके लिए वह महीनों से तड़प रहा था।
यह कहानी सिर्फ एक युवक की किस्मत बदलने की दास्तां नहीं है— यह याद दिलाती है कि नियति का खेल कितना अद्भुत होता है। कभी-कभी एक अनचाहा पल, एक अंजानी मुलाकात, एक अनदेखी फोटो…पूरी जिंदगी बदल देती है।
किस्मत की इस लिखी हुई स्क्रिप्ट में कौन-सा दृश्य कब आएगा, कोई नहीं जानता लेकिन यह कहानी बताती है कि हर मेहनत, हर संघर्ष, हर दर्द… भविष्य की किसी बड़ी रोशनी से जुड़ा होता है।









