राजस्थान में मिड डे मील योजना से जुड़े एक बड़े घोटाले ने सबको चौंका दिया है। कोरोना काल के दौरान प्रदेश के 66,341 शिक्षण संस्थानों में पहली से आठवीं कक्षा के 62.67 लाख छात्रों को मिलने वाले मिड डे मील से जुड़ा यह मामला है।
पहले राजस्थान पुलिस ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। लेकिन बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अनुशंसा पर दोबारा जांच शुरू की गई। इस नई जांच में पुलिस को करीब 2000 करोड़ रुपये के घोटाले के ठोस सबूत मिले।
घोटाले के सबूत मिलने के बाद राजस्थान पुलिस ने नई FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में अब जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका पर भी गहन जांच की जा रही है।
यह घोटाला मिड डे मील योजना की पारदर्शिता और निगरानी की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है और इसे लेकर समाज और मीडिया में भी तीखी चर्चा हो रही है।








