वाराणसी। विशेषज्ञ और विकासवादियों का मानना है कि पूर्वांचल क्षेत्र को 2047 तक आत्मनिर्भर और समर्थ प्रदेश बनाने के लक्ष्य के लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता है। जबकि मध्यांचल में लखनऊ के आसपास उद्योग और फैक्ट्रियां तेजी से स्थापित हो रही हैं, पूर्वांचल के लोग अभी भी पीछे छूटे हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश का GDP 2025 में 9.5% तक पहुंच गया है और निर्यात 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है, लेकिन पूर्वांचल के लोगों का योगदान न्यूनतम है। इसके चलते शिक्षित युवा रोजगार के लिए अन्य जिलों या प्रदेशों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
पूर्वांचल के विकास के लिए सुझाव दिए गए हैं कि:
- वाराणसी को कमिश्नरेट घोषित किया जाए।
- विंध्यांचल मण्डल को पर्यटन क्षेत्र घोषित कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं।
- शिक्षक, कारीगर, श्रमिक और प्रबुद्ध जनों की सहभागिता सुनिश्चित कर पूर्वांचल के लिए अलग विकास पैकेज तैयार किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि तब ही आत्मनिर्भर भारत मिशन शक्ति करण का विजन साकार किया जा सकता है और पूर्वांचल के लोग खुशहाल जीवन जी सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक पूर्वांचल को विशेष पैकेज और योजनाओं के तहत विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक यह क्षेत्र पिछड़ता रहेगा और लाखों शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की समस्या बनी रहेगी।
रिपोर्ट- इफ्तेखार हाशमी









