वाराणसी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को बनारस के बिजलीकर्मियों ने भेलूपुर स्थित पावर हाउस पर बिजली के निजीकरण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि बिजली आमजन की बुनियादी जरूरत है, इसे मुनाफे का साधन नहीं बनाया जा सकता।

वक्ताओं ने बताया कि मंगलवार को संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल प्रबंध निदेशक से मिलेगा और 20 जून 2025 को हुए समझौते के पालन की मांग करेगा। साथ ही दशहरा और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों से पहले फेसियल अटेंडेंस के नाम पर रोकी गई वेतन राशि को जारी करने का आग्रह किया जाएगा।
कर्मचारियों ने निजीकरण से जनता और बिजलीकर्मियों को होने वाले नुकसान गिनाए। इनमें बिजली दरों में बढ़ोतरी, ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी, सरकारी नियंत्रण में कमी, कर्मचारियों की छंटनी और पदोन्नति पर प्रतिकूल असर, रखरखाव में लापरवाही, हादसों का खतरा और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ शामिल हैं।
सभा को ई. मायाशंकर तिवारी, ई. राजेंद्र सिंह, ई. नीरज बिंद, अंकुर पांडेय, जिउतलाल, कृष्णा सिंह, संदीप कुमार, राजेश सिंह, हेमंत श्रीवास्तव, पंकज यादव, बृजेश यादव, धर्मेंद्र यादव, सूरज रावत, रोहित कुमार और मनोज यादव सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से अपील की कि बिजली निजीकरण प्रस्ताव को जनहित और उद्योग हित में निरस्त किया जाए तथा मौजूदा व्यवस्था में सुधार लाकर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।







