गाजीपुर। औड़िहार स्थित गंगा किनारे पौराणिक महत्व वाले वराह रूप घाट का कायाकल्प तेजी से चल रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा 1 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से घाट और आसपास के क्षेत्र का सुंदरीकरण कराया जा रहा है।
इस कार्य में साधारण संगमरमर या लाल पत्थर के बजाय विश्वविख्यात मकराना के पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य गीता कंस्ट्रक्शंस द्वारा कराया जा रहा है। पंचायत भवन के समीप और वराहरूप मंदिर के बगल में सुंदर सिंहद्वार, पार्क, गोलंबरनुमा चबूतरे तथा अन्य संरचनाएँ बन रही हैं।
निर्माण कार्य देख रहे गीता कंस्ट्रक्शंस के देवराज सिंह ठाकुर व नितेश सिंह भोनू ने बताया कि यहां का कायाकल्प वाराणसी के कैथी गंगा घाट की तर्ज पर किया जा रहा है। विशेष रूप से मकराना पत्थरों का उपयोग परिसर की सुंदरता को और भव्य बनाएगा।
पर्यटन विभाग ने प्रारंभ में इस परियोजना के लिए 2.12 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था, जिसे बाद में घटाकर 1.66 करोड़ रुपये कर दिया गया। कार्य तेजी से प्रगति पर है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
पौराणिक महत्व
मान्यता है कि जब असुर हिरण्याक्ष ने पृथ्वी का अपहरण कर समुद्र की गहराइयों में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने अपने तीसरे अवतार वराह रूप में प्रकट होकर अपने सींगों पर धरती को समुद्र से बाहर निकाला था। इसी स्थान पर भगवान वराह ने राक्षस हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को सुरक्षित किया। यहां भगवान वराह की स्वयंभू प्रतिमा आज भी स्थापित है, जो इस तीर्थ की पौराणिक महत्ता को दर्शाती है।
ब्यूरोचीफ: संजय यादव







