गाजीपुर। छह महीने लंबी दक्षिणायन यात्रा समाप्त होकर आज से भगवान सूर्यदев उत्तर दिशा की यात्रा आरंभ करेंगे, जिससे उत्तरायणी पर्वों की शुरुआत हो जाएगी। माघ मास के आरंभ के साथ विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिषीय अनुसार माघ कृष्ण एकादशी के दिन सूर्यनारायण अनुराधा नक्षत्र में धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे और संक्रांति पुण्यकाल प्रारंभ होगा। शास्त्रीय मान्यता है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही तिल फटकने लगते हैं और गुड़-तिल के पर्वों की शुरुआत होती है। इस दौरान लोहड़ी, सकट, षट्तिला एकादशी, वसंत पंचमी, मौनी मावस आदि प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।
इस बार सकट पर्व पहले ही संपन्न हो चुका है। उत्तरायण होते ही सूर्य दक्षिण-पूर्व दिशा से उत्तर की ओर गति करेंगे। मकर संक्रांति के समय से तिल फटकने लगते हैं और ठंड कम होने लगती है, जबकि सूर्य का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है। यद्यपि 31 दिसंबर से चल रहा 40 दिवसीय शीतकालीन चिलचिलाती ठंड का प्रभाव 8 फरवरी तक जारी रहेगा।
14 जनवरी से हेमंत ऋतु का विदा और शिशिर ऋतु की शुरुआत होगी। ज्योतिषियों के अनुसार, अग्नि और तिल पर्व सूर्य के तेजस को बढ़ाते हैं और नवाचार एवं ऊर्जा उत्सर्जन का पर्व माने जाते हैं। उत्तर भारत में इसे स्नान पर्व के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन गंगासागर और प्रयागराज में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। पंजाब में लोहड़ी का पर्व अग्नि पूजा, गुड़, तिल और मूंगफली के साथ मनाया जाता है।
इस अवसर पर घरों में उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बनाई जाती है और खिचड़ी, घी, तिल और गुड़ का दान भी किया जाता है। मकर संक्रांति केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह अनंत ऊर्जा की साधना और चेतना जागरण का पर्व भी माना जाता है।
ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से मकर राशि में प्रवेश करते सूर्य पुरातन हैं, लेकिन उनका प्रकाश सदैव नवीनता और आनंद का स्रोत है। पर्व का पुण्यकाल कल भी जारी रहेगा और इसे श्रद्धापूर्वक मनाने की परंपरा है।
ब्यूरो चीफ – संजय यादव, गाजीपुर









