वाराणसी। लोहता थाना क्षेत्र के कोटवा खरका गांव में न्यायालय में विचाराधीन मामले के बावजूद कथित तौर पर प्रशासनिक अनदेखी का मामला सामने आया है। मकसूद आलम पुत्र सरफराज का विवाद अपर सिविल जज की अदालत में विचाराधीन है, वहीं हाई कोर्ट में दाखिल रिवीजन को एसडीएम सदर द्वारा नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित के अनुसार राजस्व विभाग व लोहता थाना पुलिस, कोटवा चौकी प्रभारी पूरे दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान मकसूद आलम और उसके परिवार से तीखी नोकझोंक हुई। बताया गया कि हाई कोर्ट की रीड (आदेश) राजस्व टीम को दिखाने पर वे वापस लौट गए, लेकिन इसके बाद विपक्षी पक्ष के लोग—हाजी खुर्शीद, हाजी नसीम, रिजवानू जमा, आसिफ जमाल, सोहेल महमूद, नवाब शरीफ, जाकिर हुसैन, मोहम्मद हुसैन, शहीद फरीद आदि—कथित तौर पर मकसूद आलम की बाउंड्रीवाल और शौचालय को गलत तरीके से तोड़ने का प्रयास करते रहे।

मकसूद आलम का आरोप है कि विपक्षियों द्वारा पहले भी कई बार जानलेवा हमले किए गए, जिनके संबंध में लोहता थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं और लगातार धमकियां मिल रही हैं। साथ ही आराजी संख्या 993 (रकबा 0.2 एयर) नवीन परती भूमि की नापी को गलत बताते हुए कहा गया कि गांव में किसी स्थायी बिंदु (कुआं) से पैमाइश नहीं की गई, न ही चौहद्दी स्पष्ट की गई।

पीड़ित पक्ष का दावा है कि वे बाप-दादा के जमाने से आराजी संख्या 921 ‘ग’ पर बतौर आबादी मकान, शौचालय और बाउंड्रीवाल बनाकर काबिज चले आ रहे हैं। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और नापी रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

रिपोर्ट- अशोक कुमार गुप्ता









