अहमदाबाद। गुजरात में हर साल नवरात्रि के मौके पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहाँ पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। यह परंपरा लगभग 200 साल पुरानी है और इसे स्थानीय लोग “सदुमा ना गरबा” के नाम से जानते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, 200 साल पहले साधुबेन नाम की एक महिला ने मुगल सरदार से अपनी रक्षा के लिए बारोट कम्युनिटी के पुरुषों से मदद मांगी थी। लेकिन पुरुषों ने मदद नहीं की। दुखी साधुबेन ने उन्हें कायर होने का श्राप दे दिया और फिर अपने जीवन का अंत कर लिया।
तब से इस कम्युनिटी के पुरुष हर नवरात्रि में साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। यह न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि इतिहास की याद भी दिलाता है।









