वाराणसी: काशी, बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी, गुरु वंदना के महापर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ पर गुरुभक्ति में सराबोर है। ‘बंदऊं गुरु पद पदुम परागा’ की भावना के साथ शिष्य अपने-अपने गुरुजनों के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। संपूर्ण नगर भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म से ओतप्रोत है।
गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत झलक आज वाराणसी के मठों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर देखने को मिल रही है। सुबह से ही शिष्यगण अपने गुरुजनों के चरणों में पहुंचकर विधिवत पूजन, अर्चन व प्रणाम कर रहे हैं। गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए भजन, कीर्तन, हवन और सत्संग जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
पड़ाव स्थित अघोर पीठ श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम में भी श्रद्धालुओं का बड़ा जनसैलाब उमड़ पड़ा। यहां पीठाधीश्वर गुरुपद संभव राम के दर्शन और चरण-स्पर्श के लिए भक्तगण सुबह से ही कतारबद्ध नजर आए। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत माहौल ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी की पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा एक बार फिर जीवंत होती दिखी, जहां श्रद्धालु गुरु को ब्रह्म, विष्णु और महेश के समान पूज्य मानकर उनकी वंदना कर रहे हैं।
शहर के अन्य प्रमुख आश्रमों व शिक्षण संस्थानों में भी गुरु पूर्णिमा के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां ध्यान, प्रवचन, भक्ति गीतों और प्रसाद वितरण के साथ इस दिन को श्रद्धापूर्वक मनाया गया।









