वाराणसी: पूर्वांचल वीर सेना के प्रयास से आज ग्राम चक्का में 1962 के भारत-चीन युद्ध के वीर शहीद तिलकधारी यादव की स्मृति में एक भव्य शहीद स्मारक का उद्घाटन किया गया। यह स्मारक न केवल शहीद की अमर गाथा का प्रतीक बना, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गौरव और श्रद्धा का क्षण भी बना।

वीरता को किया नमन, स्मारक का भव्य लोकार्पण
शहीद स्मारक का उद्घाटन ग्रुप कैप्टन अशोक पांडे (सेवानिवृत्त), वायु सेना मेडल (वीरता) एवं जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, तथा कमांडर सतीश कुमार यादव (सेवानिवृत्त) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, गणमान्य अतिथियों एवं स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
शहीद को श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब
इस कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से ग्राम प्रधान मधुवन यादव, 1971 युद्ध के वीर नायक राम सेवक यादव (सेना मेडल – वीरता), पूर्वांचल वीर सेना के अध्यक्ष सूबेदार मेजर सुरेश नागर, राष्ट्रीय संयोजक कैप्टन बड़ेलाल यादव, मीडिया संयोजक हवलदार पवन सिंह, ब्लॉक संयोजक हवलदार विनोद यादव, संगठन सलाहकार सूबेदार बाबूलाल यादव, तथा अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारीगण जिनमें सूबेदार गिरधारी यादव, सूबेदार रमेश प्रसाद, हवलदार गुलाब यादव, तेज बहादुर पटेल, पंकज सिंह, अरुण सिंह, राजेश कुमार यादव, नायक शशिकांत सिंह, हवलदार भैयालाल यादव, और अन्य शामिल रहे।

शहीद तिलकधारी यादव के पुत्र श्री राजनाथ यादव भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और सभी को भावुक कर देने वाला वक्तव्य दिया।
श्रद्धांजलि यात्रा में उमड़ा युवाओं का जोश
शहीद को नमन करने हेतु “श्रद्धांजलि यात्रा (झांकी)” का आयोजन किया गया जो ग्राम चक्का से रामेश्वर होते हुए हरहूआ तक निकाली गई। इस यात्रा में युवाओं का उत्साह और जोश देखते ही बनता था। तिरंगे के साथ गूंजते देशभक्ति नारों से माहौल देशप्रेम में सराबोर हो गया।
मंच से गूंजीं वीरता की गाथाएं
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने 13 कुमाऊँ रेजीमेंट के वीर सपूत तिलकधारी यादव की शौर्यगाथा को साझा किया। उन्होंने बताया कि रेजांगला (लद्दाख) में दुश्मनों से मुकाबला करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
ग्राम पंचायत चक्का एवं पूर्वांचल वीर सेना ट्रस्ट का रहा विशेष योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में ग्राम पंचायत चक्का एवं पूर्वांचल वीर सेना ट्रस्ट की अहम भूमिका रही। पूरे आयोजन में अनुशासन, गरिमा और देशभक्ति की भावना स्पष्ट दिखाई दी।








