मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां गुरुवार को एक 20 वर्षीय MBBS छात्र प्रांशुल व्यास ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। पुलिस के अनुसार, प्रांशुल उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर दूर इंदौर के सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और मेडिकल शिक्षा के दूसरे वर्ष में था। उज्जैन के वसंत विहार कॉलोनी में प्रांशुल का घर था, जहां उसने यह दुखद कदम उठाया।
अकेलेपन में लिया गया कदम
पुलिस ने जानकारी दी कि जब प्रांशुल ने फांसी लगाई, उस वक्त वह घर में अकेला था। नानाखेड़ा पुलिस थाने के प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि जिस कमरे में प्रांशुल ने फांसी लगाई थी, वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। यह सवाल अब पुलिस के सामने है कि प्रांशुल ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।
फोन पर की गई ‘फांसी लगाने’ की खोज
इस घटना में एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि प्रांशुल ने अपनी मौत से पहले अपने मोबाइल फोन पर गले में फंदा लगाने के तरीके के बारे में इंटरनेट पर सर्च किया था। इस जानकारी से यह संभावना सामने आती है कि उसने यह कदम अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझ कर उठाया हो सकता है।
पुलिस करेगी जांच और दोस्तों से पूछताछ
पुलिस अधिकारी यादव ने बताया कि प्रांशुल के दोस्तों से पूछताछ की जाएगी ताकि इस घटना के पीछे की वजहों को समझा जा सके। इसके साथ ही, उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स और मोबाइल फोन की भी जांच की जाएगी। यह देखने की कोशिश होगी कि कहीं प्रांशुल किसी मानसिक दबाव, डिप्रेशन या किसी अन्य समस्या का सामना कर रहा था, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या करने का निर्णय लिया।
प्रांशुल का जीवन: एक नजर
प्रांशुल व्यास, उज्जैन के निवासी और मेडिकल कॉलेज के दूसरे वर्ष के छात्र थे। इंदौर में पढ़ाई के दौरान वह दो दोस्तों के साथ किराये के एक मकान में रह रहे थे। एक होनहार छात्र होने के बावजूद, यह घटना इस बात का इशारा करती है कि शायद उनके अंदर कोई ऐसा संघर्ष चल रहा था, जिसका उन्हें सामना करना कठिन हो रहा था।
मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
प्रांशुल की इस दुखद मौत ने एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर किया है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता कितनी जरूरी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पढ़ाई और काम का दबाव, व्यक्तिगत समस्याएं और मानसिक तनाव युवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। खासकर मेडिकल जैसे कठिन क्षेत्रों में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर पढ़ाई और करियर से जुड़ा तनाव बहुत बड़ा हो सकता है। अगर इस तनाव का सही समय पर सामना न किया जाए, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं।
आत्महत्या के मामले और बढ़ता मानसिक तनाव
भारत में आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर युवा वर्ग में। पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक समस्याएं, रिश्तों में कड़वाहट या आर्थिक परेशानियां कई बार युवाओं को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर देती हैं। कई बार मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे इतने गंभीर होते हैं कि व्यक्ति अपने जीवन के महत्व को भूलकर आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेता है।
समाज की भूमिका: आत्महत्या रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम एक समाज के रूप में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कितने संवेदनशील हैं। आज भी कई परिवारों और समाज के हिस्सों में मानसिक तनाव, अवसाद या अन्य मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है या फिर इसे कमजोरी का प्रतीक माना जाता है। हमें यह समझना होगा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को मानसिक तनाव या डिप्रेशन हो रहा है, तो उसे तुरंत मनोचिकित्सा की मदद लेनी चाहिए।
परिवार और दोस्तों का सहयोग महत्वपूर्ण
कई बार ऐसे मामलों में देखा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को समय रहते सही सहयोग और संवेदना मिल जाए, तो उसे आत्महत्या जैसे विचारों से बाहर निकाला जा सकता है। परिवार, दोस्तों और शिक्षकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अगर कोई छात्र या युवक किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है, तो उसे अकेला न छोड़ा जाए। उसकी भावनाओं को समझा जाए और उसे सही दिशा में मदद दी जाए।
सही समय पर मदद और काउंसलिंग की जरूरत
प्रांशुल की मौत ने इस बात की तरफ इशारा किया है कि शायद वह अकेला महसूस कर रहा था या फिर उसकी समस्याओं का हल उसे समझ में नहीं आ रहा था। ऐसे मामलों में अगर सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग या अन्य सहायता दी जाए, तो कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है। मानसिक तनाव और अवसाद जैसे मामलों में काउंसलिंग एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी
यह जरूरी है कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाई जाए। स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सत्र आयोजित किए जाएं ताकि लोग इस मुद्दे पर खुलकर बात कर सकें और सही समय पर मदद ले सकें। प्रांशुल जैसे होनहार छात्रों का जीवन इस तरह खत्म न हो, इसके लिए हमें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझना और इस दिशा में काम करना बेहद जरूरी है।









