वाराणसी: प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों के मर्जर (पेयरिंग) की योजना का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े संगठनों की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें स्कूलों के मर्जर के फैसले को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की गई।
ज्ञापन में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में देशभर में कुल 89,441 स्कूल बंद किए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश के करीब 25,000 विद्यालय शामिल हैं। अब राज्य सरकार द्वारा 5,000 और विद्यालयों के मर्जर का निर्णय लिया गया है, जिससे प्रदेश के करीब 27,000 विद्यालय प्रभावित होंगे।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस निर्णय का सीधा असर 1.35 लाख सहायक शिक्षकों और 27,000 प्रधानाध्यापकों की स्थिति पर पड़ेगा। साथ ही, शिक्षामित्रों, रसोइयों और सहायक कर्मचारियों की सेवाओं पर भी संकट मंडराने लगेगा। प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि विद्यालयों की दूरी बढ़ने से हजारों बच्चे शिक्षा से वंचित हो सकते हैं, और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के प्रभाव में कमी आने से कुपोषण की समस्या एक बार फिर गंभीर हो सकती है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित छह मांगें उठाई गईं:
- परिषदीय विद्यालयों की बंदी और पेयरिंग प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, शिक्षा पर GDP का न्यूनतम 6% व्यय सुनिश्चित किया जाए।
- सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, बैग, वर्दी, छात्रवृत्ति आदि की समय पर उपलब्धता हो।
- मिड-डे मील योजना को पोषण एवं गुणवत्ता की दृष्टि से सुदृढ़ किया जाए।
- शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों एवं सहायक कर्मचारियों की सेवाएं स्थायी की जाएं और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
- विद्यालयों में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक शिक्षा पद्धति को प्रोत्साहित किया जाए और प्रत्येक विद्यालय की जवाबदेही तय की जाए।









