मिर्जापुर: जिले के अहरौरा नगर स्थित पट्टी कला मोहल्ले में वर्षों पुराना प्राचीन शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं की राह देख रहा है। मंदिर परिसर में फैला कूड़ा-करकट, गुटखा की पन्नियां और गंदे नाले का जमा पानी मंदिर की दुर्दशा का जीता-जागता प्रमाण है।
स्थानीय समाजसेवी विश्वजीत सिंह के संज्ञान में मामला आने के बाद मंदिर के कायाकल्प के लिए लोगों से सहयोग की अपील की जा रही है। मंदिर के पास रहने वाले नत्थू सोनकर ने बताया कि यह शिवलिंग काफी प्राचीन है। पहले यहां जलजीरा साईं नामक एक फकीर सेवा-पूजा किया करते थे। उनके निधन के बाद मंदिर के सामने मजार बन गई, जहां अब लोग बृहस्पतिवार और शुक्रवार को चादर चढ़ाने लगे, जबकि शिव मंदिर उपेक्षा का शिकार होता चला गया।
मंदिर के चारों ओर कूड़ा-कचरा और नाले का गंदा पानी जमा है, लेकिन न तो नगर पालिका प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही स्थानीय बुद्धिजीवी कोई पहल कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मंदिर के पास ही नवनिर्मित पार्क मौजूद है, बावजूद इसके पार्क की बाउंड्री मंदिर को शामिल किए बिना मोड़ दी गई। यदि प्रशासन चाहता तो मंदिर को पार्क की सीमा में लेकर उसका समुचित विकास किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय मंदिर के चारों ओर रेलिंग लगाकर उसे अलग कर दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 25-30 वर्ष पहले मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास हुआ था, लेकिन सामूहिक सहयोग के अभाव में कार्य अधूरा रह गया। उस समय बनाए गए पिलर, दरवाजा और आंशिक चबूतरा आज भी उसी स्थिति में मौजूद हैं।
रिपोर्ट- अनुप कुमार









