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वाराणसी: जेल में बंद दुष्कर्म के आरोपी की मौत पर परिजनों का हंगामा, पिता बोले-मेरे बेटे की हत्या हुई है

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वाराणसी: चौकाघाट स्थित जिला जेल में दुष्कर्म के आरोप में पिछले तीन वर्षों से बंद आरोपी आशुतोष सिंह की मौत के बाद हड़कंप मच गया। पेशी से ठीक पहले उसकी मौत हो गई, जिससे जेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मृतक के पिता राघवेंद्र सिंह ने मीडिया से बात करते हुए जेल प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा फर्जी मुकदमे में फंसाया गया, और जमानत के लिए हाई कोर्ट तक गए, लेकिन पैसे और साजिश के चलते जमानत नहीं मिली।

“मुझे मौत की नहीं, तबीयत खराब होने की सूचना दी गई थी”

राघवेंद्र सिंह ने बताया कि 11:02 बजे जिला जेल से फोन आया कि आपके बेटे को सीने में दर्द हुआ है और उसे कबीर चौरा अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने पूछा कि बेटा ठीक है या नहीं, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। जब वह अस्पताल पहुंचे, तो आशुतोष की मौत हो चुकी थी।

“जिंदा होता तो साइन करता, लेकिन अंगूठा लगाया गया”

पिता का कहना है कि उनका बेटा पूरी तरह स्वस्थ था, और अगर वह जीवित होता तो दस्तखत करता, लेकिन दस्तखत की जगह अंगूठे का निशान लगाया गया, जिससे उन्हें शक है कि उसकी मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।

“जेल प्रशासन ने जल्दीबाजी में शव मोर्चरी में रखवाया”

राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि बिना उन्हें शव दिखाए ही उसे मोर्चरी में रख दिया गया, और जब उन्होंने पूछा तो उन्हें बताया गया कि आशुतोष की मृत्यु हो चुकी है। उनका सवाल है कि इतनी जल्दी किस आधार पर मृत्यु की पुष्टि कर शव को मोर्चरी में रखा गया?

“हत्या का संदेह, जांच की मांग”

परिजनों ने शक जाहिर किया कि आशुतोष की या तो गला दबाकर हत्या की गई या उसे जहर दिया गया। उन्होंने कहा कि आशुतोष जब गिरफ्तार हुआ था तब वह बी.ए. फर्स्ट ईयर का छात्र था और उसका पूरा जीवन बर्बाद कर दिया गया।

“पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कोई ठोस कारण नहीं आया”

पिता का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में न तो बलात्कार का कोई प्रमाण मिला और न ही जबरदस्ती का, इसके बावजूद बेटे को फर्जी केस में फंसाया गया और आखिरकार उसकी जेल में संदिग्ध मौत हो गई।

जिला मुख्यालय पर न्याय की गुहार

राघवेंद्र सिंह व परिजन मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और बेटे की मौत के मामले में न्यायिक जांच व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा “अगर मेरे बेटे को न्याय नहीं मिला, तो यह सिर्फ एक मौत नहीं बल्कि सिस्टम की हत्या होगी।”

प्रशासन की चुप्पी

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला जेल प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की मांग तेज हो गई है।

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